नयी दिल्ली: 21 अक्टूबर (ए) देश भर के 126 नक्सल प्रभावित जिलों के लगभग 2,000 कलाकार, गुजरात के केवडिया में इस साल होने वाली ‘एकता दिवस’ परेड में हिस्सा लेंगे। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बुधवार को यह जानकारी दी।
यह परेड राष्ट्रीय एकता और सशस्त्र नक्सलवाद के खात्मे का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक विशेष कार्यक्रम का हिस्सा है।
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, मोहन ने बताया कि सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले वार्षिक ‘एकता दिवस’ समारोह में परेड, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य कार्यक्रम होंगे, जिनमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि इस साल के कार्यक्रम पिछले सालों से कुछ अलग होंगे। इन आयोजनों में कई पहल शामिल होंगी, जिनका मकसद देश से नक्सलवाद को खत्म करने में सुरक्षा बलों की उपलब्धियों को उजागर करना और देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करना है। इसमें बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा लिखित ‘आनंदमठ’ पर आधारित एक नाटक के साथ-साथ, देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर गुजरात में बसने वाले लोगों द्वारा प्रस्तुत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होगा।
मोहन ने कहा कि इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में 126 जिलों के लगभग 2,000 कलाकार एक साथ आएंगे; ये वे जिले हैं जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में नक्सली हिंसा का दंश झेला है।
उन्होंने कहा कि उनकी भागीदारी उन समुदायों की जीवटता को रेखांकित करेगी जिन्होंने संघर्ष झेला है, और साथ ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की भूमिका को भी सामने लाया जाएगा।
गृह सचिव ने कहा, “हम इन 126 जिलों से लगभग 5,000 लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। ये लोग न केवल इन कार्यक्रमों के दर्शक होंगे, बल्कि अपनी यात्रा और प्रवास के दौरान लोगों से बातचीत करते हुए अपने अनुभव भी साझा करेंगे। वे बताएंगे कि कैसे एक समय उनके जिलों में नक्सलवाद का बोलबाला था, देश ने इसके खिलाफ किस तरह संघर्ष किया, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब वहां उग्रवाद, हिंसा और तमाम तरह की तबाही की जगह विकास की एक नयी लहर चल रही है।”
उन्होंने कहा, “वे अपने जीवन में आए बड़े बदलावों के बारे में बताएंगे। तो, यह इस साल की ‘एकता परेड’ की एक नई विशेषता है। दूसरी विशेषता यह है कि इस बार हम पूरी परेड और कार्यक्रम शाम के समय आयोजित करेंगे, क्योंकि अक्टूबर के महीने में भी इन इलाकों में तापमान काफी ज्यादा रहता है।”
उन्होंने कहा कि इस दौरान ‘लाइट एंड साउंड शो’ कार्यक्रमों का आकर्षण भी बढ़ जाएगा।
उन्होंने बताया कि एक और नई चीज झांकियां होंगी, जिन्हें ‘माईगॉव’ पर आयोजित एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता के जरिए तैयार किया गया है। यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर पर और गुजरात के हर जिले में आयोजित की गई थी, जिसमें हर जिले को ‘वंदे मातरम’ गीत से एक अलग थीम दी गई थी।
मोहन ने बताया कि विशेषज्ञों ने कुल 15 सर्वश्रेष्ठ डिजाइन चुने हैं। उन्होंने कहा कि इन झांकियों के लिए मिलने वाली धनराशि का एक बड़ा हिस्सा ‘कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व’ (सीएसआर) फंड से आया है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस बार देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर गुजरात में बसने वाले समुदायों से कहा गया है कि वे गुजरात से जुड़ी थीम पर आधारित अपने सांस्कृतिक कार्यक्रम खुद तैयार करें।
इसके परिणामस्वरूप 50 अलग-अलग सांस्कृतिक तत्वों को चुना गया है, जिन्हें मिलाकर एक ऐसा कार्यक्रम तैयार किया गया है जिसमें 5,000 कलाकार हिस्सा ले रहे हैं; जबकि पिछले साल इसमें 1,500 कलाकारों ने प्रस्तुति दी थी।
इसके अलावा एक मुख्य आकर्षण केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, अन्य केंद्रीय पुलिस संगठनों और राज्य पुलिस बलों के कर्मियों की भागीदारी होगी, जिन्होंने सशस्त्र नक्सलवाद से निपटने में अहम भूमिका निभाई है।
उन्होंने बताया कि जब टुकड़ियां प्रधानमंत्री के सामने से गुजरेंगी, तो एलईडी स्क्रीन पर लघु फिल्में दिखाई जाएंगी, जिनमें प्रभावित क्षेत्रों में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में उनके योगदान तथा उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा।
इन आयोजनों का उद्देश्य पूरे भारत के लोगों को केवडिया आने के लिए प्रोत्साहित करना भी है, जहां ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थित है—जो सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है।
