
संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया समेत इन देशों ने पश्चिम एशिया में वाणिज्यिक जहाजों तथा तेल और गैस सुविधाओं पर ईरान के हमलों की निंदा की है।बयान में कहा गया कि ईरान ने निहत्थे कमर्शियल जहाजों पर हमले किए, नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे तेल व गैस को निशाना बनाया और ईरानी बलों की ओर से जलडमरूमध्य की वास्तविक बंदी कर दी गई है। इन देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताते हुए ईरान से तत्काल अपनी धमकियां, माइंस बिछाना, ड्रोन और मिसाइल हमले व अन्य कार्रवाइयां बंद करने की मांग की है, जो जहाजों को रोक रही हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस व्यापार का अहम मार्ग है। इसकी बंदी से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गहरा असर पड़ रहा है।बयान में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वे मिलकर इस संकट का समाधान निकालें ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहें। इन देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का हवाला देते हुए ईरान से स्वतंत्र नौवहन के सिद्धांत का पालन करने को कहा है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव चरम पर है और कई जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज स्ट्रेट की यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है। ईरान ने दावा किया है कि जलडमरूमध्य केवल दुश्मन जहाजों के लिए बंद है, लेकिन वाणिज्यिक जहाजरानी लगभग ठप हो चुकी है।