लखनऊ: दो नवंबर (ए) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का नाम लिए बिना भगवान श्रीकृष्ण पर उनकी कथित टिप्पणी की सोमवार को कड़ी आलोचना की और इस मामले का उच्चतम स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने की मांग की।
मीडिया में आई खबरों के अनुसार, मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के करैरा में श्रीराम कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए कथित तौर पर विवादित टिप्पणी की थी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस टिप्पणी पर संत समाज के एक वर्ग की आपत्ति के बाद शास्त्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उनका राम और कृष्ण के बीच भेद पैदा करने का कोई इरादा नहीं था। अखिलेश ने सोमवार शाम सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सुदर्शन चक्रधारी भगवान श्रीकृष्ण का एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक है कि कोई राजनीतिक प्रश्रय प्राप्त ‘लघु-बंधु’ बनकर घूम रहा व्यक्ति सनातन समाज की एकता को तोड़ने का अति निंदनीय कार्य कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि पूज्य अवतारों के बीच अपमानजनक तुलना कर एक अवतार को दूसरे से बेहतर बताने की साजिश सनातन समाज के विरुद्ध गहरी चाल है।
यादव ने कहा, ‘‘लोकरक्षक और लोकरंजक दोनों एक ही के अवतार हैं, फिर ऐसी गरिमाहीन तुलना का तर्क क्या है, यह स्पष्ट किया जाए। ईशनिंदा का अपराध करने वाले ऐसे व्यक्ति के पीछे उसके किसी संगी-साथी की कुटिल मंशा काम करती दिखती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे निंदात्मक विषय पर तो हर राजनीतिक दल और उसके समर्थक भी इस तथाकथित वाचक के विरुद्ध एकजुट हो गए हैं। अगर इसे नहीं रोका गया तो इससे समाज में अशांति और असंतोष का वैमनस्यकारी वातावरण बनेगा। ये अक्षम्य पाप है, ऐसे व्यक्ति को समाज, सनातन, देश हित में निरुद्ध-अवरुद्ध करना ही एकमात्र उपाय है।’’
उन्होंने सनातन धर्म के खिलाफ कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि ‘‘ये सब अनायास ही नहीं हो रहा, इसके पीछे कोई तो है जो इस छल-कुचक्र को रच रहा है। अब वे सब कहां हैं जो अपने को सनातन का ठेकेदार मानते हैं, क्या वो अपने परंपरागत भूमिगत निवास में जाकर छिप गए हैं।’’
सपा प्रमुख ने कहा कि हर सच्चा सनातनी दोनों अवतारों का उपासक होता है और इस अनुचित तुलना से सनातन समाज के साथ-साथ अन्य समाजों के लोग भी आहत हुए हैं।
यादव ने इसी पोस्ट में कहा, ‘‘हर धर्म-मजहब-संप्रदाय या उसके आराध्यों-महापुरुषों के प्रति किसी भी प्रकार का विष-वमन कदापि स्वीकार्य नहीं है। सर्वोच्च स्तर पर संज्ञान लेकर दंडात्मक कार्रवाई हो।’’
