नयी दिल्ली: 13 फरवरी (ए)
विभाग सांस लेने, मुंह खोलने और पलक झपकाने जैसे चेहरे के महत्वपूर्ण कार्यों में बाधा से जूझ रहे मरीजों और कई शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के बावजूद लाभान्वित न हुए रोगियों को इस प्रक्रिया का लाभ पहुंचाएगा।
विभाग 11 से 15 फरवरी तक ‘बर्न्स एंड प्लास्टिक सर्जरी ब्लॉक’ में एक गहन शव परीक्षण कार्यशाला और अकादमिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन भी कर रहा है। कार्यशाला के अंतर्गत, बृहस्पतिवार को ‘ब्रेनडेड’ रोगी के चेहरे की त्वचा का नमूना लिया गया।
इस उन्नत प्रशिक्षण पहल का नेतृत्व करने के लिए, एम्स ने बोस्टन के ब्रिघम एंड विमेंस हॉस्पिटल (हार्वर्ड मेडिकल स्कूल) में प्लास्टिक सर्जरी के एसोसिएट चीफ डॉ. इंद्रनील सिन्हा की मेजबानी की, जो ‘कंपोजिट टिश्यू एलोट्रांसप्लांटेशन’ और ‘फेस ट्रांसप्लांट सर्जरी’ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डॉ. मनीष सिंघल अन्य संकाय सदस्यों, डॉ. शशांक चौहान, डॉ. राजा तिवारी, डॉ. राजकुमार मानस, डॉ. शिवंगी साहा और डॉ. अपर्णा सिन्हा के साथ इस कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे।
एम्स के ‘प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव एंड बर्न सर्जरी’ विभाग के प्रमुख डॉ. सिंघल ने बताया कि तेजाब हमले, गोली लगने से और अन्य आघातों के कारण चेहरे की गंभीर विकृतियों से पीड़ित बड़ी संख्या में मरीज़ 10 से 12 सर्जरी के बाद भी इस स्थिति से उबर नहीं पाते हैं।
डॉ. सिंघल ने कहा, ‘‘एम्स में इस क्षमता का विकास उन रोगियों को समग्र कार्यात्मक और सौंदर्यपूर्ण पुनर्वास प्रदान करने के लिए आवश्यक है जिनके पास वर्तमान में बहुत सीमित विकल्प हैं।’’
डॉ. इंद्रनील सिन्हा ने स्वीकार किया कि एम्स में उपलब्ध कौशल और बुनियादी ढांचा अंतरराष्ट्रीय मानकों के बराबर है। उन्होंने कार्यक्रम को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया।
चेहरा प्रतिरोपण एक चिकित्सीय प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के चेहरे के पूरे या आंशिक हिस्से का पुनर्निर्माण मृत दाता से प्राप्त ऊतकों का उपयोग करके किया जाता है। उसका उद्देश्य कार्यक्षमता और सौंदर्य को बहाल करना होता है।