लखनऊ: 29 नवंबर (ए)
यादव ने एसआईआर अभियान के दौरान ड्यूटीरत एक बीएलओ की कथित तौर पर मस्तिष्काघात से मौत के बाद उसके परिजनों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने के बाद सपा मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।
यादव ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाते हुए कहा, ”ये (एसआईआर) सोची समझी साजिश है, रणनीति है। बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के दिये हुए संविधान के तहत हमें जो वोट डालने का अधिकार है, उस अधिकार को छीनने की तैयारी है।”
उन्होंने कहा, ”ये (केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग) एसआईआर के बहाने वोट डालने का अधिकार छीन रहे हैं। आरक्षण, आपकी पहचान छीनेंगे और आपके ऊपर उल्टे सीधे दबाव बनाएंगे।”
सपा प्रमुख ने 14 नवंबर को मस्तिष्काघात से मृत बीएलओ विजय कुमार वर्मा का जिक्र करते हुए ये गंभीर आरोप लगाए। यादव ने कहा कि सरकार के लोग इस बात का दबाव बना रहे हैं कि वह (बीएलओ) ड्यूटी में ही नहीं थे और पहले से ही बीमार थे।
बीएलओ वर्मा के परिजनों ने मीडिया के सामने कहा कि ” वे (वर्मा) शिक्षा मित्र थे, उनकी ड्यूटी बीएलओ में लगाई गई थी। उन्हें मस्तिष्काघात हुआ 14 तारीख को और उस दिन वह काम पर गये थे। रात में 11 बजे बैठकर अपना काम कर रहे थे, तभी कुर्सी से गिरे और हम लोग उन्हें अस्पताल ले गये, जहां चिकित्सकों ने बताया कि मस्तिष्काघात हुआ है।”
मृतक की पत्नी ने आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि ”एक अधिकारी ने कहा कि वह पहले से कार्यमुक्त थे, जब 14 तारीख को कार्य किया तो कार्यमुक्त कैसे हो गये। प्रशासन की तरफ से कोई मदद भी नहीं मिली और झूठा आरोप लगा रहे हैं।”
यादव ने परिजनों को दो लाख रुपये का चेक सौंपते हुए कहा कि ”अभी इस परिवार को पार्टी की तरफ से दो लाख रुपये दे रहे हैं। हमारी मांग है कि एक करोड़ रुपये इस परिवार को मदद की जाए और सरकारी नौकरी के अलावा तमाम सरकारी योजनाओं से इन्हें जोड़ा जाए।”
सपा प्रमुख ने बीएलओ के परिवार के बयान का जिक्र करते हुए कहा, ”ड्यूटी पर रहने के दौरान बीएलओ की मौत हुई, लेकिन अधिकारी दबाव बनाते हैं और यह साजिश रची जा रही है कि वह ड्यूटी पर नहीं थे। जिस स्कूल में वह शिक्षा मित्र थे, उस पर भी दबाव बनाया जा रहा है कि वे पहले से बीमार थे।”
यादव ने कहा कि ”सपा की पहले दिन से मांग है कि पहले तो इस तरह काम का दबाव न बनाया जाए, क्योंकि यह बहुत जिम्मेदारी और सावधानी का काम है और बहुत संवेदनशील कार्य है। एक बार फॉर्म खारिज हो गया और वोट आपका नहीं बना तो पूरे कागजात के साथ घूमना पड़ेगा।”
पूर्व मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि ”यह एसआईआर है, आखिर भाजपा इतनी जल्दबाजी में क्यों है। चुनाव आयोग और भाजपा मिले हुए हैं और दोनों जल्दबाजी कर रहे हैं।”
सपा प्रमुख ने सवाल करते हुए कहा, ”पहले भी मैं यह बात कह चुका हूं कि उत्तर प्रदेश में लगातार शादियां हो रही हैं और शादियों के समय में लोगों को एक-दूसरे के यहां आना जाना, तैयारी करना होता और सब व्यस्त हैं। इतने कम समय में पूरे प्रदेश का एसआईआर कराने की क्या आवश्यकता है।”
उन्होंने व्यवस्था पर भी व्यंग्य कसते हुए कहा कि ”यहां तक कि जिम्मेदारी नगर पालिका के सफाईकर्मियों को भी दी गई है। फॉर्म में इतनी तकनीकी बातें हैं और बीएलओ का सहायक सफाई कर्मचारी को बनाया गया है। और इस फॉर्म को बंटवाने में की जाने वाली जल्दबाजी, बंटा नहीं बंटा लेकिन जो सरकार के आंकड़े बता रहे हैं कि सभी फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।”