पटना: सात मार्च (ए)
है, जिसमें अलग-अलग राज्यों की दो महिलाओं ने एक ही रैंक का दावा किया है।
विवाद 301वीं रैंक को लेकर है, जिसमें आकांक्षा सिंह नाम की दो उम्मीदवार इस पद पर दावा कर रही हैं।
एक तरफ बिहार के आरा की आकांक्षा सिंह, जो प्रतिबंधित ‘रणवीर सेना’ के संस्थापक ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती हैं, के इस पद को हासिल करने की व्यापक रूप से खबरें आ रही हैं।
दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह नामक एक अन्य उम्मीदवार ने दावा किया है कि यह रैंक उनकी है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक प्रवेश पत्र में एक ही नाम और अनुक्रमांक दिखाई देने के बाद विवाद और भी बढ़ गया, जिससे मामला और भी जटिल हो गया।
विरोधाभासी दावों के सामने आने के बाद, अब आधिकारिक स्पष्टीकरण के लिए सबकी निगाहें संघ लोक सेवा आयोग पर टिकी हैं।
शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए, ब्रह्मेश्वर सिंह की पोती आकांक्षा ने दावा किया कि उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यूपीएससी प्रशासनिक सेवा परीक्षा 2025 में 301वीं रैंक हासिल की है।
उन्होंने कहा, “मुझे इस बार सफलता हासिल करने का पूरा भरोसा था। यह मेरे दादाजी का सपना था। उन्हें मुझ पर बहुत विश्वास था।” ब्रह्मेश्वर सिंह की 2012 में हत्या हो गयी थी।
आकांक्षा ने बताया कि तैयारी के दौरान वह रोजाना आठ से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं।
इसी बीच, गाजीपुर की निवासी एक अन्य आकांक्षा सिंह ने फेसबुक पर फर्जी पहचान का आरोप लगाते हुए पोस्ट किया।
उन्होंने लिखा, “यह बात सामने आई है कि मेरी रैंक और पहचान का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने फेसबुक पोस्ट में दो दस्तावेज़ संलग्न किए, जिन्हें उन्होंने अपना असली पहचान पत्र और ई-समन बताया।
नाम और अनुक्रमांक तो एक जैसे हैं, लेकिन पिता के नाम अलग-अलग हैं।
हालांकि, इस मामले पर आगे की टिप्पणी के लिए उनसे संपर्क नहीं हो सका।