नयी दिल्ली: 30 जनवरी (ए)
बाजार सूत्रों के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 14,000 रुपये, या 7.65 प्रतिशत टूटकर 1,69,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर सहित) रह गया। बृहस्पतिवार को सोने की कीमत 12,000 रुपये बढ़कर 1,83,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई थी।चांदी की कीमत 20,000 रुपये, या लगभग पांच प्रतिशत टूटकर 3,84,500 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) रह गई। पिछले कारोबारी सत्र में चांदी की कीमत 19,500 रुपये बढ़कर 4,04,500 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक – जिंस सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘शुक्रवार को सोने और चांदी में भारी गिरावट देखी गई, क्योंकि हाल ही में रिकॉर्ड तोड़ तेजी के बाद निवेशकों ने तेज़ गति से मुनाफावसूली शुरू कर दी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह गिरावट मुख्य रूप से बड़े संस्थागत कारोबारियों द्वारा लंबे सौदों की भारी बिक्री के कारण हुई, जिन्होंने कई सत्रों की मज़बूत बढ़त के बाद मुनाफावसूली की कोशिश की।’’
उन्होंने कहा कि डॉलर में सुधार होने से सर्राफा पर और दबाव पड़ा। ‘‘तकनीकी नज़रिए से, पिछले कई सत्रों से सोना और चांदी दोनों में अत्यधिक खरीदारी हो रही थी, जिससे तकनीकी सुधार यानी गिरावट आने का जोखिम बढ़ गया था।’’
गांधी ने कहा कि तकनीकी स्थितियों में खिंचाव, संस्थागत मुनाफावसूली और डॉलर में सुधार, जिसके जारी रहने की संभावना है, इन सभी के सम्मिलित प्रभाव से निकट अवधि में सर्राफा पर दबाव बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, हाजिर सोना 5.31 प्रतिशत कम, या 285.30 डॉलर टूटकर 5,087.73 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। दिन में कारोबार के दौरान सोना 425.86 डॉलर या 7.92 प्रतिशत टूटकर 4,945.26 डॉलर प्रति औंस पर आ गया था।
बृहस्पतिवार को, सोना 5,595.02 डॉलर के नए रिकॉर्ड पर पहुंचने के बाद 5,371.12 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ था।
हाजिर चांदी भी 14 डॉलर या 12.09 प्रतिशत गिरकर 101.47 डॉलर प्रति औंस रह गई, जबकि विदेशी कारोबार में दिन के कारोबार में यह 17.5 प्रतिशत तक गिरकर 95.26 डॉलर प्रति औंस रह गई थी। बृहस्पतिवार को, यह 121.45 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर पहुंची थी।
इनक्रेड मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विजय कुप्पा ने कहा, कुछ कारणों से सोने और चांदी की कीमतों में तेज़ गिरावट आई है। दोनों सर्राफा की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद, विश्व स्तर पर कुछ मुनाफावसूली होती दिख रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस बढ़ोतरी के कारण ऊंचे स्तर पर कोई समर्थन मूल्य तय नहीं किया गया था, इसलिए तकनीकी सुधार या गिरावट तेज़ रहा है।’’
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा केविन वार्श को अमेरिका के केन्द्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व के अगले प्रमुख के रूप में नामित करने के बाद अनिश्चितता है, जिससे बाजार थोड़ा जोखिम से बचने की स्थिति में रहा, क्योंकि बाजारों को डर है कि नया नेतृत्व ज़्यादा आक्रामक हो सकता है।