नयी दिल्ली: 25 फरवरी (ए
अंतरिम आदेश में रामदेव के व्यक्तित्व अधिकारों का सरंक्षण करते हुए, न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने कहा कि डीपफेक वीडियो और सोशल मीडिया वेब पेज जिनमें रामदेव को उत्पादों, उपचारों या दवाओं को बढ़ावा देते हुए दिखाया गया है, उससे उनकी सार्वजनिक छवि प्रभावित होती है और उनकी विश्वसनीयता धूमिल हो सकती है।
इस मुद्दे पर रामदेव द्वारा दायर वाद की सुनवाई कर रही अदालत ने आदेश प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर सभी मंचों से ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को हटाने का भी निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय ने 18 फरवरी को दिए आदेश में कहा, ‘‘इस न्यायालय ने प्रथम दृष्टया पाया कि विवादित सामग्री न केवल वादी के अपनी छवि, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व के अन्य गुणों की रक्षा करने के अधिकार का उल्लंघन करती है, बल्कि इससे भी आगे बढ़कर एआई जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग करके वादी की तस्वीरों से छेड़छाड़ की गई है या उन लोगों और उत्पादों से जोड़ा गया है जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है।’’