पेरिस: 28 मार्च (ए)
जयशंकर ने शनिवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘बीती रात फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है।’’
विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से मैक्रों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
जयशंकर ने कहा, ‘‘चर्चा और उनकी अंतर्दृष्टियों को महत्व देता हूं।’’
वह बृहस्पतिवार को फ्रांस के अब्बे डे वॉक्स-डे-सर्ने में, साझेदार देशों के साथ जी7 विदेश मंत्रियों की दो-दिवसीय बैठक में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे।
हालांकि, भारत जी7 का सदस्य नहीं है, फिर भी इस शक्तिशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष फ्रांस ने उसे एक भागीदार देश के तौर पर आमंत्रित किया है।
बृहस्पतिवार को फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने संबोधन में, जयशंकर ने ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों की ऊर्जा, खाद्य और ईंधन सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया, और साथ ही वैश्विक शासन सुधारों की तात्कालिक आवश्यकता पर भी जोर दिया।
विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताओं की पृष्ठभूमि में, सुदृढ़ व्यापार गलियारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर भी बात की।
जी7 बैठक के दौरान, जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल और यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ अलग-अलग बातचीत की। समझा जाता है कि इस बातचीत में पश्चिम एशिया संकट का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
जयशंकर ने कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा से भी मुलाकात की।
जी7 दुनिया की सात सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं-कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका को एक साथ लाता है। यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है।
भारत के अलावा, फ्रांस ने सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और ब्राजील को आमंत्रित किया है।
जी7 अपने सदस्यों के लिए वैश्विक मंच पर प्रमुख आर्थिक, वित्तीय और भू-राजनीतिक चुनौतियों के जवाब में चर्चा करने तथा कार्रवाई का समन्वय करने के लिए एक पसंदीदा मंच के रूप में कार्य करता है।