नयी दिल्ली: 23 जनवरी (ए)
नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर जेएनयू में अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि पारंपरिक उपनिवेशवाद की जगह नव-उपनिवेशवाद ने ले ली है, और अब समाज ‘‘संज्ञानात्मक उपनिवेशवाद के युग में प्रवेश कर रहा है’’ जो बौद्धिक और मनोवैज्ञानिक क्षेत्रों को लक्षित करता है।
नेताजी की 129वीं जयंती के अवसर पर जेएनयू में अपने व्याख्यान में उन्होंने कहा कि पारंपरिक उपनिवेशवाद की जगह नव-उपनिवेशवाद ने ले ली है, और अब समाज ‘‘संज्ञानात्मक उपनिवेशवाद के युग में प्रवेश कर रहा है’’ जो बौद्धिक और मनोवैज्ञानिक क्षेत्रों को लक्षित करता है।
जनरल चौहान ने कहा कि उन्होंने ‘‘संज्ञानात्मक उपनिवेशवाद’’ वाक्यांश गढ़ा है।
सीडीएस ने बोस के नेतृत्व गुणों की सराहना करते हुए कहा कि वह एक सैन्य राजनेता होने के साथ ही एक महान व्यक्तित्व भी थे।
जनरल चौहान ने कहा कि नेताजी के पास रणनीतिक दूरदर्शिता और अपने समय की वैश्विक गतिशीलता को समझने की दृष्टि थी और उनकी नीति वर्तमान वैश्विक स्थिति में भारत के लिहाज से पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है।