तियानजिन (चीन): 31 अगस्त (ए)
मोदी और शी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर हुई व्यापक वार्ता के दौरान इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि विकास में साझेदार हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों पक्षों के बीच मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए।
दोनों नेताओं ने अमेरिका की शुल्क संबंधी नीति के कारण पैदा हुई आर्थिक उथल-पुथल की पृष्ठभूमि में एक नीतिगत रुख का संकेत देते हुए वैश्विक व्यापार को स्थिर करने में अपनी अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को भी स्वीकार किया।
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत एवं चीन दोनों ही रणनीतिक स्वायत्तता चाहते हैं और उनके संबंधों को किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
बयान में बताया गया कि दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर निष्पक्ष व्यापार एवं आतंकवाद जैसी चुनौतियों और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार का विस्तार करने की आवश्यकता को समझा।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने पिछले साल अक्टूबर में कजान में हुई अपनी पिछली बैठक के बाद से द्विपक्षीय संबंधों में आई सकारात्मक गति और निरंतर प्रगति का स्वागत किया।
बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि विकास में साझेदार हैं और उनके मतभेद विवादों में नहीं बदलने चाहिए।’’
प्रधानमंत्री ने द्विपक्षीय संबंधों के निरंतर विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द के महत्व पर जोर दिया।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने पिछले वर्ष सैनिकों को सीमा से सफलतापूर्वक पीछे हटाए जाने और उसके बाद से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सौहार्द बनाए रखने पर संतोष व्यक्त किया।
इसने कहा, ‘‘उन्होंने अपने समग्र द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान को लेकर प्रतिबद्धता व्यक्त की।’’
बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों को स्वीकार किया और उनके प्रयासों को आगे भी समर्थन देने पर सहमति व्यक्त की।’’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ की अध्यक्षता और तियानजिन में शिखर सम्मेलन के लिए चीन के प्रति समर्थन व्यक्त किया।
मोदी ने राष्ट्रपति शी को 2026 में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी आमंत्रित किया।
मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रपति शी ने निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन की पेशकश की।