यरुशलम: 26 फरवरी (ए)
प्रधानमंत्री मोदी की नौ साल में इजराइल की यह दूसरी यात्रा थी।
अपनी यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल के अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग के साथ वार्ता की।
मोदी और नेतन्याहू के बीच हुई वार्ता के बाद, दोनों देशों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किये और असैन्य और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्रों में मिलकर काम करने का निर्णय लिया।
दोनों पक्षों ने “पारस्परिक रूप से लाभकारी” मुक्त व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप देने पर सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा शांति पहल का जोरदार समर्थन करते हुए कहा कि मानवता को कभी संघर्ष का शिकार नहीं बनना चाहिए।
भारत और इजराइल के बीच भारत-पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के कार्यान्वयन और आई2यू2 (भारत-इजराइल-यूएई-अमेरिका) के ढांचे के तहत सहयोग पर भी चर्चा हुई।
इससे पहले बुधवार को मोदी ने इजराइल की संसद ‘नेसेट’ में अपने ऐतिहासिक संबोधन में गाजा शांति पहल को पूरे क्षेत्र के लिए ‘न्यायपूर्ण और स्थायी शांति’ का मार्ग बताया, साथ ही उन्होंने इजराइल के प्रति एकजुटता का सशक्त संदेश देते हुए कहा कि ‘‘आतंकवाद चाहे कहीं हो, यह हर जगह की शांति के लिए खतरा है’’।
मोदी को भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी यह पदक पाने वाले पहले नेता हैं। यह इजराइली संसद ‘नेसेट’ का सर्वोच्च सम्मान है।
मोदी बृहस्पतिवार को यहां स्थित याद वाशेम स्मारक भी गये और ‘होलोकॉस्ट’ के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की।