नयी दिल्ली: 28 मार्च (ए)
शीर्ष अदालत ने 2018 में ‘निपुण सक्सेना’ मामले में अपने फैसले में कहा था, ‘‘कोई भी व्यक्ति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, सोशल मीडिया आदि में पीड़िता का नाम प्रकाशित या प्रसारित नहीं कर सकता और न ही किसी भी रूप में ऐसे तथ्य उजागर कर सकता है जिससे पीड़िता की पहचान सामने आए या आम जनता को उसकी पहचान पता चल सके।’’
