नयी दिल्ली: 10 अप्रैल (ए)
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द करते हुए की, जिसमें 2016 के एक हत्या मामले में दो दोषियों की अपील लंबित रहने के दौरान उनकी सजा को निलंबित कर दिया गया था।
