उप्र: मंत्री ने परीक्षा में सवाल के जवाब में “पंडित” विकल्प दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई

उत्तर प्रदेश लखनऊ
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लखनऊ: 15 मार्च (ए) उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने रविवार को इस मामले में जांच की मांग की।

रविवार को जारी एक बयान में राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने प्रश्न के विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई।

उन्होंने इसे अनुचित और आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि यह सामाजिक समरसता को प्रभावित करने वाला कदम है।

उपाध्याय ने कहा कि यह कृत्य मानसिक विकृति से ग्रस्त किसी प्रश्न पत्र बनाने वाले की जानबूझकर की गई हरकत प्रतीत होता है।

उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

मंत्री ने कहा कि किसी भी जाति, वर्ग या परंपरा का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा।

देवरिया से भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके अनुमोदन की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

भदोही जिले के ज्ञानपुर से विधायक विपुल दुबे ने भी मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि प्रश्न स्पष्ट रूप से गलत तरीके से पूछा गया था और इससे बुद्धिजीवी वर्ग का अपमान करने की मानसिकता झलकती है।

उन्होंने कहा कि इससे न केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, बल्कि यह सरकार की छवि धूमिल करने, जातीय तनाव भड़काने और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करने का भी प्रयास हो सकता है।

इस मुद्दे को लेकर रविवार को राज्य की राजधानी के गोमतीनगर क्षेत्र में एक संगठन ने विरोध प्रदर्शन भी किया।

वहीं, उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने शनिवार देर शाम बताया कि संबंधित प्रश्न के मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं।

बोर्ड ने कहा कि जांच के बाद दोष तय कर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार को आयोजित परीक्षा में पूछा गया था, “अवसर के अनुसार बदल जाने वालों के लिए एक शब्द में उत्तर दें।”

इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ शामिल थे।

‘पंडित’ शब्द को विकल्प के रूप में शामिल किए जाने पर विवाद खड़ा हो गया।