नयी दिल्ली: 28 जनवरी (ए)) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक विधि छात्र की उस याचिका पर विचार करने की सहमति जताई, जिसमें केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग को डाक मतपत्र से मतदान की सुविधा का विस्तार छात्र मतदाताओं, खासतौर पर अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों से बाहर के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे छात्र मतादाताओं, तक करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर की इस दलील पर गौर किया कि एहतियाती हिरासत में रखे गए व्यक्ति को डाक मतपत्र के जरिये वोट डालने की अनुमति है, लेकिन एक छात्र मतदाता को ऐसा करने की इजाजत नहीं है।