कोल्लम (केरलम): 27 सितंबर (ए) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि दुनिया संघर्षों, मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रही है तथा इन चुनौतियों से निपटने के लिए मानवता को प्रौद्योगिकी प्रगति से अधिक करुणा की आवश्यकता है।
राधाकृष्णन माता अमृतानंदमयी के 73वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
यहां माता अमृतानंदमयी का जन्मदिन ‘विश्वास सेवा दिनम’ के रूप में मनाया जा रहा है, जिन्हें प्यार से ‘अम्मा’ कहा जाता है।
इस कार्यक्रम में केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन, विधानसभा अध्यक्ष तिरुवनचूर राधाकृष्णन, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी भी शामिल हुए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत जब ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है, तब विकास के लिए बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, निवेश, नवाचार और आर्थिक विकास की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा, विकास में मानवीय संवेदना और मानवीय स्पर्श भी होना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘अम्मा’ नि:स्वार्थ प्रेम और सभी की सेवा के माध्यम से यह भूमिका निभाती हैं।
राधाकृष्णन ने इस मौके पर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “वह केवल आध्यात्मिक व्यक्तित्व ही नहीं हैं, बल्कि एक चमत्कार भी हैं। उनके मार्गदर्शन से हमें दूसरों की बेहतर सेवा करने में मदद मिलेगी।’’
आर्लेकर ने भी ‘अम्मा’ को शुभकामनाएं दीं और कहा कि उनका जीवन प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए इस दिन को ‘विश्व सेवा दिनम’ के रूप में मनाया जा रहा है।’’
आर्लेकर ने यह भी कहा कि उनके जीवन को अनुभव करने और समझने की आवश्यकता है तथा उनका जीवन लोगों को दूसरों के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करता है।
सतीशन ने कहा, ‘‘यह अवसर हमें यह एहसास कराता है कि “कर्म शब्दों से अधिक प्रभावशाली होते हैं’’।
उन्होंने कहा कि ‘अम्मा’ “प्रेम और स्नेह का अथाह सागर” हैं तथा उन्हें देखने के बाद हर कोई दूसरों की मदद करने के लिए और अधिक ऊर्जा से भर जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार वादे के अनुसार संवेदनशीलता के साथ सुशासन प्रदान करेगी।
