
निर्वाचन आयोग के अनुसार, सभी 32 चरणों की मतगणना पूरी होने के बाद प्रशांत किशोर को 64,151 मत मिले जबकि भाजपा के नीरज कुमार को 44,827 मत प्राप्त हुए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी 14,273 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं।
अन्य उम्मीदवारों में प्रगतिशील जनता पार्टी के मनोरंजन कुमार श्रीवास्तव को 973, राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के तनवीर आलम को 864, भारतीय आम अवाम पार्टी के प्रदीप कुमार को 781, भारतीय जवान किसान पार्टी के बैजनाथ प्रसाद को 383, निर्दलीय उम्मीदवार अनिल दास को 311 तथा निर्दलीय सिकंदर कुमार को 264 मत मिले।
किशोर की जीत को उनकी पार्टी से बाहर के कई नेताओं ने भी ‘भाजपा के अहंकार के लिए सबक’ करार दिया। इनमें जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य भी शामिल हैं। भाकपा (माले) लिबरेशन विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन की सहयोगी पार्टी है।
तीस जुलाई को हुए मतदान से पहले कई दिनों तक प्रशांत किशोर और भाजपा की ओर से जोरदार चुनाव प्रचार किया गया था। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगाए और इस संबंध में निर्वाचन आयोग का भी रुख किया।
1970 के दशक के जेपी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘बांकीपुर का जनादेश हाल के छात्र आंदोलनों में भाजपा के प्रति दिखे व्यापक असंतोष की पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। साथ ही प्रशांत किशोर को भी इसका श्रेय दिया जाना चाहिए, जिन्होंने असाधारण ऊर्जा और संगठनात्मक क्षमता का प्रदर्शन किया।’
राजद के प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने भी परिणाम पर खुशी जताई। राजद अक्सर प्रशांत किशोर को भाजपा की ‘बी टीम’ बताती रही है। गगन ने कहा, ‘हमारे लिए यह अधिक महत्वपूर्ण है कि भाजपा अपने गढ़ में पराजित हुई, बजाय इसके कि जीत किसकी हुई।’
उल्लेखनीय है कि नितिन नवीन ने नवंबर पिछले वर्ष लगातार पांचवीं बार बांकीपुर विधानसभा सीट जीती थी। हालांकि, अप्रैल में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।