नयी दिल्ली: 19 अक्टूबर (ए) अभिनेता मनोज जोशी ने नाटक ‘एक अखंड भारत का निर्माण: सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत’ में पटेल की भूमिका निभाने को बड़ा चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारी भरा बताने के साथ ही कहा कि इस नाटक के लिए सात साल तक गहन शोध के साथ ही 260 से ज्यादा किताबों का अध्ययन किया गया।
मनोज जोशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में यह बात कही।
उन्होंने कहा, “किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को मंच पर जीवंत करने के लिए उसके विचारों, व्यक्तित्व, कार्यशैली और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को गहराई से समझना जरूरी होता है। इसी दृष्टिकोण के साथ मैंने नाटक ‘एक अखंड भारत का निर्माण: सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत’ में सरदार पटेल की भूमिका निभाने की तैयारी की।”
जोशी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारतीय रियासतों के एकीकरण में सरदार पटेल की भूमिका देश के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है जिसे नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की जरूरत है।
सरदार पटेल के किरदार को निभाने में सबसे बड़ी चुनौती को याद करते हुए उन्होंने कहा कि केवल संवाद याद करना पर्याप्त नहीं था बल्कि उनके व्यक्तित्व, स्पष्टवादिता, निर्णय लेने की क्षमता, बोलने के अंदाज और शारीरिक हाव-भाव को समझना भी जरूरी था। इसके लिए ऐतिहासिक पुस्तकों, दस्तावेजों और उपलब्ध दृश्य सामग्री का सहारा लिया गया।
एक ऐतिहासिक किरदार को विश्वसनीय बनाने वाले तत्वों के बारे में मनोज जोशी का कहना था कि कलाकार को उसके व्यक्तित्व में उतरना पड़ता है और इस भूमिका के लिए सिर्फ मेकअप में ही उन्हें लगभग पौने दो घंटे लगते हैं।
‘एक अखंड भारत का निर्माण: सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत’ का मंचन दिल्ली के कमानी ऑडिटोरियम में आगामी शनिवार और रविवार को होगा।
पांच भाषाओं में करीब 180 फिल्मों में काम कर चुके मनोज जोशी रंगमंच पर ‘चाणक्य’ की भूमिका के लिए भी जाने जाते हैं और इस नाटक का देशभर में 1800 से ज्यादा बार मंचन हो चुका है।
नाटक के निर्देशक विरल रच्छ ने कहा कि ‘एक अखंड भारत का निर्माण’ का उद्देश्य केवल इतिहास को मंच पर दोहराना नहीं, बल्कि दर्शकों को उस दौर की परिस्थितियों, फैसलों और राष्ट्रीय एकता के महत्व से जोड़ना है।
उन्होंने बताया कि इस नाटक की परिकल्पना पर लगभग एक दशक पहले चर्चा शुरू हुई थी और लेखिका गीता माणिक ने विषय पर लंबे समय तक शोध किया तथा करीब सात वर्षों तक अध्ययन करते हुए 260 से अधिक पुस्तकों का संदर्भ लिया।
नाटक के निर्देशक ने कहा कि इस विषय में नाटक, फिल्म या वेब सीरीज के लिए भी काफी संभावनाएं हैं, लेकिन मंच पर इसे प्रस्तुत करने की अपनी अलग चुनौती है और सीमित समय में इतने व्यापक ऐतिहासिक घटनाक्रम को प्रभावी ढंग से दर्शकों तक पहुंचाना आसान नहीं था।
मनोज जोशी की सरदार पटेल की भूमिका को लेकर पूछे गये एक सवाल पर विरल ने बताया कि जोशी और लेखिका गीता माणिक के बीच इस विषय पर लंबे समय तक चर्चा होती रही और बाद में निर्देशक के रूप में वह इस प्रयास से जुड़े और नाटक ने आकार लिया।
निर्देशक ने बताया कि नाटक में करीब 26 कलाकार शामिल हैं और अलग-अलग पृष्ठभूमि से आए कलाकारों के सामूहिक प्रयास और तकनीकी सहयोग से प्रस्तुति को व्यापक रूप दिया गया है।
देश के मौजूदा हालात में सरदार पटेल के विचार कितने प्रासंगिक हैं, यह पूछने पर मनोज जोशी ने कहा कि सरदार पटेल की विरासत केवल भारत के एकीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन से सार्वजनिक जिम्मेदारी, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता जैसे महत्वपूर्ण मूल्य भी सामने आते हैं।
जोशी ने बताया कि नाटक के प्रसंगों के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गई है कि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है।
