मुंबई: 17 अक्टूबर (ए) इस्तेमाल की मियाद पूरी कर चुके, खराब खाद्य पदार्थों की बिक्री के खिलाफ महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्रवाई के दौरान 48 लाख रुपये मूल्य की सामग्री जब्त किए जाने के बाद रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकिट और जोमैटो हाइपरप्योर के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ठाणे के शांति नगर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकिट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों सहित 10 लोग नामजद हैं। इनमें निपटान कार्य से जुड़ी एजेंसी के संचालकों तथा स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं को भी नामजद किया गया है।
प्राथमिकी खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
मामले में नामजद आरोपियों में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक वी. सुब्रमण्यम, इसी कंपनी के अशोक कुमार सिंह, रिलायंस रिटेल लिमिटेड के विजय भीकाजी खरमले और कंपनी के गोदाम प्रबंधक नीलेश रामदासराव देशमुख शामिल हैं।
अन्य आरोपियों में ब्लिंकिट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक अरबिंदर सिंह ढींसा, ब्लिंकिट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के दीपक सिंह, जोमैटो हाइपरप्योर प्राइवेट लिमिटेड के आबिद शेख, मेसर्स बी.के. डिस्पोज के बाबर मिया अहमद सिद्दीकी, भिवंडी के चविंद्रा स्थित आपूर्तिकर्ता गुलजार अब्दुल खान और भिवंडी के एक बिक्री केंद्र के संचालक अब्दुल मोबिन खान शामिल हैं।
एफडीए के सूत्रों ने बताया कि 14 और 15 अक्टूबर को ठाणे एवं पुणे जिलों में कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
जब्त खाद्य सामग्री में भिवंडी स्थित एक निपटान केंद्र से मिले 24 लाख रुपये से अधिक, वडपे स्थित रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदाम से करीब 4.92 लाख रुपये और उसाटने स्थित जोमैटो हाइपरप्योर के परिसर से मिले लगभग 7.81 लाख रुपये मूल्य के उत्पाद शामिल हैं।
जब्त की गई सामग्री का मूल्य 48,09,924 रुपये आंका गया है।
एफडीए के एक सूत्र ने ‘ बताया कि प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस्तेमाल की मियाद पूरी कर चुके, खराब खाद्य पदार्थों और ग्राहकों द्वारा लौटाई गई सामग्री को नष्ट किया जाना था लेकिन इन्हें कथित तौर पर निपटान एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले छंटाई केंद्रों और बिचौलियों के माध्यम से दूसरी जगह भेज दिया गया।
आरोप है कि इन एजेंसियों ने उत्पादों को वास्तव में नष्ट किए जाने की पर्याप्त पुष्टि किए बिना ही उनके नष्ट किए जाने का दावा करते हुए प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज जारी कर दिए।
एफडीए अधिकारियों को निपटान संबंधी रिकॉर्ड में भी कई गड़बड़ियां मिलीं।
सूत्र ने बताया कि सामग्री भिवंडी में बिना लाइसेंस वाले गोदामों में छांटी जाती थी। वहां बिक्री योग्य दिखने वाले पैकेट अलग करके दलालों और आपूर्तिकर्ताओं को बेच दिए जाते थे।
