नयी दिल्ली: दो अप्रैल (ए)
न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि इस गीत ने अदालत की ‘‘अंतरात्मा पूरी तरह से झकझोर’’ दी है और कानून के शासन द्वारा शासित समाज में कलात्मक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में नाबालिगों की पहुंच वाले मंचों पर ऐसे गीत का प्रसार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है