दमन: एक अग्सत (ए)
दमन, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव केंद्र शासित प्रदेश के दमन स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रणिता भारसकाडे-वाघ की अदालत ने उमेश पटेल और सह-आरोपी व पूर्व जिला पंचायत सदस्य सुरेश पटेल को यह सजा सुनाई।
दोनों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। हालांकि, ऊपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए उनकी सजा को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया गया।
दोनों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य का पालन करने से जानबूझकर रोकना) और धारा 353 (लोक सेवक के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) के तहत दोषी ठहराया गया।
हालांकि, अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 332 (पुलिसकर्मी को जानबूझकर चोट पहुंचाना), धारा 452 (अवैध रूप से घर या परिसर में घुसना) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मामला 12 मार्च 2011 का है, जब दोनों ने मोती दमन के फुटबॉल मैदान में कथित रूप से प्रवेश किया था, जहां आबकारी उप-निरीक्षक के पद के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी थी।
शिकायतकर्ता और उस समय के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जगमोहनेंद्र सिंह ने शिकायत में आरोप लगाया था कि दोनों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को धक्का दिया और जबरन उस स्थान में प्रवेश किया, जहां उप-निरीक्षकों की साक्षात्कार प्रक्रिया जारी थी।
शिकायत के अनुसार उन्होंने पुलिसकर्मियों से दुर्व्यवहार किया और सरकारी कर्मचारियों को उनके आधिकारिक कार्य करने से रोका।
मुकदमे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने शनिवार को दोनों को दोषी ठहराया और दो साल की साधारण कैद की सजा सुनाई।
उमेश पटेल ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दमन एवं दीव सीट से तीन बार के भाजपा सांसद लालू पटेल को हराया था।