इजराइल में नेतन्याहू की पार्टी ने चुनाव में ‘धांधली’,वोट चोरी का आरोप लगाया, नतीजों में बहुमत गंवाता दिखा उनका गठबंधन

अंतरराष्ट्रीय
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यरुशलम: 30 अक्टूबर (एपी) इजराइल में हुए चुनाव के अंतिम नतीजों से दिखायी दे रहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन ने संसद में अपना बहुमत खो दिया है जिसके बाद नेतन्याहू की पार्टी ने अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव ‘चुराने’ के आरोप लगाए हैं।

पार्टी ने यह भी आशंका जताई है कि इस कथित साजिश में विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है।वहीं विपक्ष ने नेतन्याहू पर अरब आबादी को निशाना बनाने और चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर नतीजों को अमान्य ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद नेतन्याहू खेमे की ओर से इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

यदि विपक्ष की अन्य पार्टियां अरब दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने पर सहमत हो जाती हैं, तो संसद में ये बहुमत हासिल कर सकती हैं। हालांकि, ऐसा गठबंधन राजनीतिक रूप से असामान्य और जोखिम भरा होगा।बृहस्पतिवार को चुनाव अधिकारियों की ओर से जारी अंतिम नतीजों के मुताबिक, नेतन्याहू के गठबंधन को 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में 53 सीट मिली हैं। यह पिछली संसद में उसके पास अधिकतम 68 सीट के मुकाबले काफी कम है। वहीं, मुख्य विपक्षी गठबंधन को 48 सीट और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों को कुल 19 सीट मिली हैं।

मतगणना पूरी हो चुकी है, लेकिन नतीजों को अभी आधिकारिक मंजूरी मिलनी बाकी है। इन्हें अगले बुधवार को देश के राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।नेतन्याहू की पार्टी लिकुड ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए है। मंगलवार को हुए मतदान के बाद ‘एग्जिट पोल’ में नेतन्याहू को झटका लगने के संकेत मिलने के बाद से ही उनकी पार्टी लिकुड अरब नेतृत्व वाली पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगा रही है।हालांकि, इजराइल की चुनाव समिति के प्रमुख और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नोआम सोहल्बर्ग के उस बयान के बाद इन आरोपों को और हवा मिली, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके सामने विदेशी हस्तक्षेप से जुड़े ‘गंभीर संदेह’ रखे गए हैं।सोहल्बर्ग ने इजराइल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी शिन बेट को लिखे पत्र में कहा कि वह इन दावों की पुष्टि नहीं कर सकते। हालांकि, आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने एजेंसी से मामले की जांच करने का अनुरोध किया।

इसके बाद नेतन्याहू की पार्टी ने एक तीखा बयान जारी करते हुए कहा, ‘इजराइल में चुनाव चुरा लिया गया है।पार्टी ने बिना कोई सबूत पेश किए दावा किया कि कथित विदेशी हस्तक्षेप का मकसद संसद पर विदेशी कब्जा करवाना, इजराइल का इस्लामीकरण करना और दक्षिणपंथी सरकार को सत्ता से हटाना है।इजराइली मीडिया की खबरों के मुताबिक, नेतन्याहू की पार्टी के कुछ सदस्य चुनाव में पिछड़ने में कतर का हाथ बता रहे हैं। इजराइल में कुछ लोग कतर को गाजा के चरमपंथी संगठन हमास का समर्थक मानते हैं।

वहीं कतर ने इन आरोपों को तुरंत खारिज करते हुए इन्हें ‘हास्यास्पद और खतरनाक’ बताया।