नयी दिल्ली: सात नवंबर (ए) पत्रकार और समाचार संगठनों को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम के तहत ‘डेटा फिड्यूशियरी’ की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया है और इसलिए वे इसके प्रावधानों के दायरे में नहीं आते। सरकारी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
सूत्रों ने उन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया कि यह कानून प्रेस की स्वतंत्रता और खोजी पत्रकारिता को सीमित कर सकता है।
