नयी दिल्ली: 23 जून (ए)
डोभाल ने कहा कि इस अहम जहाजरानी मार्ग से आवाजाही की आजादी का फायदा इस क्षेत्र और इसके बाहर के देशों को भी होगा। डोभाल ने कहा, ‘‘अमेरिका और ईरान के बीच हुए एमओयू का भारत स्वागत करता है। हमें आशा है कि यह काम करेगा। इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है। इससे आपूर्ति शृंखलाओं की बाधाएं दूर होंगी और उर्वरक व रसायन जैसे क्षेत्रों में कमी की समस्या का समाधान होगा।’’
डोभाल ने अलग-अलग इलाकों में देखे जा रहे भू-राजनीतिक तनाव और विभिन्न देशों पर उनके असर पर भी बात की।
डोभाल ने कहा, ‘‘हम बहुत उथल-पुथल भरे समय में मिल रहे हैं। दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबावों और विघटनकारी तकनीक का सामना कर रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘न केवल खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि इन संघर्षों को सुलझाने या कम करने के लिए मौजूद साधन और संस्थागत तंत्र भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बहुपक्षवाद कमजोर हो रहा है’’। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने में ब्रिक्स की अहम भूमिका है।
डोभाल ने कहा, ‘‘ब्रिक्स की कल्पना उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के एक अनौपचारिक समूह के तौर पर की गई थी, ताकि एक अधिक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ा जा सके। इसका मकसद आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ को मजबूत करना था।’’
‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।
डोभाल ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक शासन में सुधार और संस्थागत बेहतरी की भी परिकल्पना की थी।
उन्होंने कहा, ‘‘ब्रिक्स देशों का एक बहुत ही खास गठबंधन है जो शांति, प्रगति, विकास और सहयोग में विश्वास रखता है।’’
नई दिल्ली इस प्रभावशाली समूह के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर इस सम्मेलन की मेज़बानी कर रही है।
ब्रिक्स में मूल रूप से ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। इसका 2024 में विस्तार हुआ और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हुए, जबकि इंडोनेशिया 2025 में इसमें शामिल हुआ।
ब्रिक्स एक प्रभावशाली समूह के तौर पर उभरा है क्योंकि यह दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाता है, जो वैश्विक आबादी के लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी के लगभग 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं।