निजी स्कूल के शिक्षकों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय नीति की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा शीर्ष न्यायालय

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नयी दिल्ली, 10 सितंबर (ए) उच्चतम न्यायालय देश में निजी स्कूल के शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति और उचित वैधानिक ढांचा तैयार करने के लिए केंद्र को निर्देश देने के अनुरोध वाली याचिका पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सहमत हो गया।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद सहित अन्य को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा। पीठ ने केरलम स्थित याचिकाकर्ता लिगिमोल जॉर्ज द्वारा दायर याचिका को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

अधिवक्ता दीपक प्रकाश के जरिए दायर याचिका में केंद्र को पेंशन लाभ, भविष्य निधि और ग्रेच्युटी तथा निजी स्कूल के शिक्षकों के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र सहित एक समान कल्याण उपायों के समन्वय, कार्यान्वयन और निगरानी के लिए राष्ट्रीय निजी स्कूल शिक्षक कल्याण बोर्ड या अन्य उचित संस्थागत तंत्र स्थापित करने पर विचार करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि पूरे भारत में मान्यता प्राप्त निजी शैक्षणिक संस्थानों में सेवारत शिक्षकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचे की अनुपस्थिति से जुड़ा यह राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।

याचिका में शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘‘यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस’’ के तहत प्रकाशित आंकड़ों का हवाला दिया गया है।इसमें कहा गया है कि 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 14.72 लाख स्कूल, 98 लाख से अधिक शिक्षक और लगभग 24.8 करोड़ छात्र हैं।

याचिका में कहा गया है, ‘‘अहम बात यह है कि 37,30,047 शिक्षक मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षण कार्यबल का एक बड़ा हिस्सा हैं। ’’