सरकार ने 37 साल पुराने डिजिटल संचार आयोग को भंग किया

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 21 सितंबर (ए) सरकार ने दूरसंचार विभाग में करीब 37 साल पहले गठित शीर्ष अंतर-विभागीय निर्णय लेने वाले निकाय डिजिटल संचार आयोग को भंग करने की अधिसूचना जारी की है।

यह निकाय 1989 में दूरसंचार आयोग के नाम से गठित किया गया था और 2018 में इसका नाम बदलकर डिजिटल संचार आयोग कर दिया गया था।

अधिसूचना में कहा गया, ‘‘भारत सरकार ने डिजिटल संचार आयोग को भंग करने का फैसला किया है। अत: इस प्रस्ताव के प्रकाशन की तारीख से डिजिटल संचार आयोग भंग माना जाएगा।’’

यह अधिसूचना 19 सितंबर को जारी की गई।

नीति आयोग, वित्त मंत्रालय, औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग तथा अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों वाले इस शीर्ष निकाय की मदद से दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े कई विवादित मुद्दों का समाधान किया जाता था।

आयोग ज्यादातर दूरसंचार मामलों पर निर्णय को अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजे जाने से पहले उसे अंतिम रूप देता था।

आयोग ने स्पेक्ट्रम के मूल्य निर्धारण और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों जैसे मामलों पर फैसले लेने में भी भूमिका निभाई।

डीसीसी की आखिरी बैठक तीन सितंबर को हुई थी, जिसमें उपग्रह संचार (सैटकॉम) के लिए स्पेक्ट्रम से संबंधित निर्णय को अंतिम रूप दिया गया था।

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक, भारती समूह समर्थित यूटेलसैट वनवेब और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस को भारत में सैटकॉम सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है।

हालांकि, स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा एजेंसियों से दूसरे चरण की सुरक्षा मंजूरी के बिना ये सेवाएं शुरू नहीं की जा सकती हैं।

डीसीसी ने दूरसंचार नियामक ट्राई की अधिकांश सिफारिशों को मंजूरी दी है। सैटकॉम स्पेक्ट्रम पर उसकी सिफारिश को अब मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलनी है।