दुबई: चार सितंबर (एपी) अमेरिकी सैनिकों की मेजबानी करने वाले जॉर्डन को ईरान के साथ जारी अमेरिका के युद्ध में वाशिंगटन के साथ करीबी संबंधों की कीमत चुकानी पड़ रही है और ईरान उसके सैन्य ठिकानों को कई बार निशाना बना चुका है।
विश्लेषकों का कहना है कि सैकड़ों ड्रोन एवं मिसाइल हमलों ने जॉर्डन पर पहले से मौजूद दबाव को और बढ़ाया है। उनका कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था सुस्त है और पड़ोसी वेस्ट बैंक में भी अस्थिरता बढ़ी है, जहां इजराइल ने फलस्तीनियों पर हमले तेज कर दिए हैं।जॉर्डन में और हमलों के खतरे के बावजूद उसके नेताओं का कहना है कि वे अमेरिका के साथ करीबी संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जॉर्डन अमेरिकी अधिकारियों के साथ सुरक्षा संबंध मजबूत करने और संघर्ष से जूझ रहे पश्चिम एशिया में पश्चिमी देशों के लिए एक भरोसेमंद साझेदार बनने की दशकों से कोशिश करता रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के साथ यह गठजोड़ जॉर्डन को अपने पड़ोसी देशों को अस्थिर करने की ईरान की कोशिशों से बचाव का एक जरिया भी देता है।
जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने ऐसे गठजोड़ की जरूरत को स्वीकार करते हुए पिछले साल कहा था कि कोविड-19 संकट, यूक्रेन पर रूस के व्यापक हमले और पश्चिम एशिया में इजराइल के कई सैन्य अभियानों से पैदा हुई अस्थिरता इस क्षेत्र से बहुत दूर तक भी अराजकता फैला सकती है।
अम्मान और वाशिंगटन ने 2021 में रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत अमेरिकी बलों को जॉर्डन में 12 सैन्य प्रतिष्ठानों तक पहुंच दी गई। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने 2025 में क्षेत्र में अपना पहला संपर्क कार्यालय भी जॉर्डन में खोला।
ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी वाले स्थलों को निशाना बनाकर कई हमले किए। हालांकि ज्यादातर मिसाइलों और ड्रोन को अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों ने उनके लक्ष्य पर पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया था।
