
प्रधान ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री को भेज दिया है। अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि युवाशक्ति ही देश की असली ताकत है और पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम को देखकर मन दुखी हो गया।सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, ”मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूं। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है।प्रधान ने यह भी कहा: “जंतर-मंतर और देश में जो स्थिति पैदा हुई है, उसका फ़ायदा देश-विरोधी ताकतों को नहीं उठाना चाहिए, देश की एकता बनी रहनी चाहिए, भारत के एक भी छात्र का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में नहीं फंसना चाहिए, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में बिताएं और करियर बनाने पर ध्यान दें – इन बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने माननीय प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है
उन्होंने आगे कहा कि 16 जुलाई को घोषित नीट यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ। मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूँ। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं।