लखनऊ,13 जून (ए)। उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) बनाई है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है।
अधिकारियों के मुताबिक, एस आईटी का गठन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किया गया। यह कदम ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के अनुरोध पर उठाया गया, जिसने इसे “गलत जानकारी को रोकने और सच सामने लाने” के लिए ज़रूरी बताया और आरोप लगाया कि राम मंदिर की छवि खराब करने की कोशिशें की जा रही हैं।एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर और आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) और आईपीएस अधिकारी किरण एस, और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।
अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दान पात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था। ट्रस्ट के अनुसार, अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रस्ट के इस अनुरोध को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभाव से तीन वरिष्ठ अधिकारियों के विशेष जांच दल का गठन किया है। यह टीम पूरे प्रकरण की गहन छानबीन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस महीने की शुरुआत में दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में आए करोड़ों रुपये गायब हो गए। अखिलेश ने इस मामले में अदालत से संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। उन्होंने सात जून को सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब होने की सूचना मिली है।