जिलाधिकारी निरंकुश होकर आदेश पारित नहीं कर सकते : इलाहाबाद उच्च न्यायालय

उत्तर प्रदेश प्रयागराज
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प्रयागराज: 31 अक्टूबर (ए) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वार्षिक गोगा नवमी मेले के प्रबंधन को लेकर बिजनौर के जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश को निलंबित करते हुए कहा कि जिलाधिकारी निरंकुश होकर कार्य नहीं कर सकते।

अदालत ने कहा कि जिलाधिकारी का आदेश प्रथम दृष्टया उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था और यह स्पष्ट रूप से दूसरे के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करने का मामला है।

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को आवश्यक प्रशासनिक अनुमति लेकर बिजनौर जिले की चांदपुर तहसील के फेवना गांव में मेला आयोजित करने की भी अनुमति दी।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विवेक सरन की पीठ ने कहा, ‘‘इस अदालत ने कई बार जिलाधिकारियों को आगाह किया है कि वे स्वयं को जिले का ऐसा सर्वशक्तिमान अधिकारी न समझें, जो किसी भी तरह का आदेश पारित कर सकते हैं, भले ही संबंधित विषय किसी अन्य जिला स्तरीय अधिकारी या न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में आता हो। प्रथम दृष्टया यह अधिकार क्षेत्र के अतिक्रमण का एक और मामला है।’’

जिलाधिकारी ने 29 अगस्त 2025 को जारी आदेश में पारंपरिक मेले का प्रबंधन ग्राम सभा को सौंप दिया था और साथ ही मेले से होने वाली आय के प्रबंधन के लिए राजस्व अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति भी गठित की थी।

प्रबंधन समिति ‘सार्वजनिक आर्य इंटर कॉलेज’ और अन्य याचिकाकर्ताओं ने जिलाधिकारी के इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ग्राम सभा के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। इस दौरान कुछ विरोधी पक्षों ने मेला आयोजित करने के उनके अधिकार पर सवाल उठाए थे।

इस मुकदमे में भूखंड संख्या 981 और 997 पर मेला आयोजित करने के याचिकाकर्ताओं के अधिकार में हस्तक्षेप रोकने के लिए निषेधाज्ञा जारी करने का अनुरोध किया गया था। वर्ष 1982 में दायर मूल मुकदमे में द्वितीय अपर सिविल न्यायाधीश ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि जिलाधिकारी का आदेश दीवानी अदालत के उस फैसले के बिल्कुल विपरीत है, जो याचिकाकर्ताओं के पक्ष में और ग्राम सभा सहित अन्य पक्षों के विरुद्ध दिया गया था।

इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर को सुनाए गए अपने फैसले में रिट याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 को होगी।