नयी दिल्ली: 13 अगस्त (ए) क्रिकेटर से नेता बने हरभजन सिंह का कहना है कि उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) छोड़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने का फैसला इसलिए किया क्योंकि मुख्यमंत्री भगवंत मान पंजाब में नशे की समस्या से जुड़ी उनकी चिंताओं और खेलों को नजरअंदाज कर रहे थे।
हरभजन ने यहां ‘ मुख्यालय में दिए गए पॉडकास्ट साक्षात्कार में ‘आप’ छोड़ने के फैसले के बाद जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर हुए जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन के बारे में भी बात की।
‘आप’ ने हरभजन को 2022 में राज्यसभा भेजा था। हालांकि, इस साल अप्रैल में उन्होंने पार्टी के छह अन्य सांसदों के साथ भाजपा का दामन थाम लिया।
हरभजन ने कहा, “जब ( पंजाब के मुख्यमंत्री) भगवंत मान ने मुझसे ‘आप’ में शामिल होने के लिए कहा था तो इसका मकसद राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करना और खेलों से जुड़े मुद्दे उठाना था। मैंने तभी साफ कर दिया था कि मैं सिर्फ खेलों के बारे में बात करूंगा और राजनीति पर चर्चा नहीं करूंगा, क्योंकि यह मेरा काम नहीं है।”
उन्होंने कहा, “मेरे ‘आप’ से जुड़ने की एकमात्र वजह यह थी कि इससे मुझे न सिर्फ पंजाब में, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों को बढ़ावा देने का मौका मिल रहा था। लेकिन जब मैंने अपने विचार रखने की कोशिश की तो पार्टी में मेरी बात नहीं सुनी गई। मेरे विचार बस विचार ही बनकर रह गए।”
हरभजन ने कहा कि पार्टी के सामने अपना नजरिया रखने की तमाम कोशिशों के बावजूद लगातार दरकिनार किए जाने से आखिरकार वह तंग आ गए।
उन्होंने कहा, “…मैं जिस काम के लिए ‘आप’ में शामिल हुआ था, वह हो ही नहीं रहा था। अगर मेरे सुझाए रास्ते पर एक छोटा-सा कदम भी उठाया गया होता तो मैं पार्टी नहीं छोड़ता। लेकिन पार्टी में शामिल होने का मेरा मकसद ही पूरा नहीं हो रहा था। इसीलिए मैंने पार्टी छोड़ दी, क्योंकि मेरे सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा था।”
‘आप’ ने अपने छह राज्यसभा सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पाला बदलने वाले सांसदों पर विश्वासघात करने का आरोप लगाया था। हरभजन के आवास के बाहर जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन हुआ था, जिसमें उनका पुतला फूंका गया था।
इस घटना के बारे में पूछे जाने पर हरभजन ने कहा कि वह किसी का नाम नहीं लेना चाहेंगे, क्योंकि यह समझना आसान है कि प्रदर्शनकारी कौन थे।
पूर्व क्रिकेटर ने कहा, “हर कोई जानता है कि वे लोग कौन थे और कहां से आए थे, मुझे कुछ भी कहने की जरूरत नहीं है। इस देश के लोग मुझे मेरे क्रिकेट के लिए जानते हैं और उन्होंने मुझे इतना प्यार दिया है, ऐसे में वे मेरा पुतला क्यों जलाएंगे या मेरे घर के बाहर ‘गद्दार’ क्यों लिखेंगे? मैंने किसके साथ गद्दारी की?”
उन्होंने कहा, “मेरा उनसे (‘आप’) सवाल है कि पंजाब के लोगों से किए गए बड़े-बड़े वादों का क्या हुआ? आपने पंजाब के लिए क्या किया? यहां गद्दार कौन है? और क्या आपने मुझसे पूछा कि मैंने जो किया, वह क्यों किया? सिर्फ इसलिए कि आप मुझे गद्दार कहते हैं, मैं गद्दार नहीं बन जाता। और न ही आपके कहने से मैं चोर बन जाता हूं।”
हरभजन ने कहा, “…मेरा दिल भारत और पंजाब के लिए धड़कता है। अपनी मातृभूमि के लिए मेरे मन में जो प्यार है, उसे किसी और से प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। इसलिए लोग कुछ भी कहते रहें, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर मैं इन सब बातों से अपना ध्यान विचलित होने दूंगा, तो मैं काम नहीं कर पाऊंगा।”
पंजाब में नशे की समस्या
-पंजाब में नशे की समस्या से जुड़े आंकड़े उपलब्ध हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों के मुताबिक, राज्य के कम से कम 15 फीसदी निवासियों ने मादक पदार्थों की लत का शिकार होने की बात स्वीकार की है।
हालांकि, शराब की लत के शिकार लोग अब भी सबसे ज्यादा हैं, लेकिन हेरोइन जैसे मादक पदार्थों के बढ़ते इस्तेमाल ने न केवल स्वास्थ्यकर्मियों, बल्कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भी चिंता बढ़ा दी है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 और 2026 के बीच पंजाब में मादक पदार्थ से जुड़े 70,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए, जिनमें 95,000 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई।
हरभजन ने कहा कि नशे की समस्या के भयानक असर के बारे में जितना भी कहा जाए, कम है।
उन्होंने कहा, “…यह सभी के लिए चिंता की बात है, क्योंकि मादक पदार्थ युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं-न सिर्फ पंजाब में, बल्कि देश में जहां भी ये पहुंचते हैं…।”
हरभजन ने कहा, “खेल एक अच्छा पैमाना है। एक समय था, जब पंजाब खेलों में पहले नंबर पर हुआ करता था।”उन्होंने जालंधर की सुरजीत सिंह हॉकी अकादमी से निकली प्रतिभाओं का जिक्र करते हुए कहा, “हॉकी टीम में अकेले संसारपुर के नौ खिलाड़ी थे और संसारपुर जालंधर का एक छोटा-सा गांव है।”
हरभजन ने कहा, “लेकिन मादक पदार्थों के आसानी से उपलब्ध होने और घर -घर पहुंचने की वजह से युवा पीढ़ी बर्बाद हो गई है। जहां भी मादक पदार्थों की लत की समस्या रही है, वहां पीढ़ियां खत्म हो गई हैं।”
उन्होंने कहा कि पंजाब का मामला इसलिए और भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि यह एक सीमावर्ती राज्य है।
हरभजन ने कहा, “हमें पता लगाने की जरूरत है कि यह (मादक पदार्थ) राज्य में कैसे प्रवेश कर रहा है? और अगर यह राज्य में प्रवेश कर रहा है, तो इसे रोकने के लिए कुछ किया जाना चाहिए, है ना? यह हमारे घरों और हमारे युवाओं तक पहुंच रहा है। इससे निपटने के लिए कड़े कानून होने चाहिए।”
