नयी दिल्ली: 24 जुलाई (ए)
नीट यूजी (चिकित्सा स्नातक में प्रवेश से संबंधित परीक्षा) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ विद्यार्थियों के विरोध-प्रदर्शन के जोर पकड़ने पर केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार देर रात उच्च शिक्षा सचिव के पद से वरिष्ठ अधिकारी विनीत जोशी को हटा दिया।
हरफनमौला और सरकार के करीबी माने जाने वाले जोशी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में कई अहम पदों पर काम किया है। इनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के अध्यक्ष, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पहले महानिदेशक और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे पद शामिल हैं।
तीस जून को संजय कुमार के सेवानिवृत होने के बाद, वह स्कूल शिक्षा सचिव का काम भी संभाल रहे थे।
एनटीए में जोशी के कार्यकाल के दौरान स्नातक में दाखिले के लिए संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) शुरू की गयी। हालांकि उन्हें इस अहम परीक्षा में आई गड़बड़ियों को लेकर सरकार की आलोचना का सामना भी करना पड़ा।
इसके बाद 2023 में, जब पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी, तो उन्हें वहां का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया।
उच्च शिक्षा सचिव के पद से हटाए जाने के बाद, जोशी को पंचायती राज मंत्रालय में सचिव नियुक्त किया गया है।
नरेश कुमार गंगवार को उच्च शिक्षा सचिव और टी के अनिल कुमार को स्कूली शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है।
गंगवार पशुपालन मंत्रालय में सचिव थे, जहां वह अलग-अलग वजहों से चर्चा में रहे।
खबरों के मुताबिक, 1994 बैच के राजस्थान-कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी गंगवार के परिवार के तीन सदस्यों को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड योजना के तहत पांच सालों में 1.16 करोड़ रुपये से ज़्यादा की सब्सिडी मिली।
गंगवार उससे पहले पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के तौर पर काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण और खतरनाक पदार्थों से जुड़े मामलों को संभाला था।
टी के अनिल कुमार इससे पहले ग्रामीण विकास मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे।
शिक्षा मंत्रालय पिछले दो महीनों से विवादों के केंद्र में है। पहले 12वीं कक्षा के लिए सीबीएसई की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) व्यवस्था में गलतियों को लेकर और फिर नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर। वहां हाल के दिनों में और भी अधिकारियों को हटाया गया है।
पिछले महीने, मंत्रालय ने सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता, दोनों को उनके पदों से हटा दिया तथा उनकी जगह क्रमशः लोखंडे प्रशांत सीताराम और वरुण भारद्वाज को नियुक्त किया।
यह कदम सीबीएसई की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में इस्तेमाल होने वाले ओएसएम तंत्र में तकनीकी खराबी, धुंधली उत्तर पुस्तिकाओं और मूल्यांकन में गलतियों को लेकर हुए भारी हंगामे के बाद उठाया गया।
इस फेरबदल में मंत्रालय में मीडिया और संचार प्रमुख आंचल कटियार को भी हटा दिया गया। कटियार को पशुपालन मंत्रालय भेज दिया गया, जबकि उनकी जगह रश्मि रोजा तुषारा नायर को नियुक्त किया गया।
नीट-यूजी को लेकर विद्यार्थियों के नेतृत्व में हो रहे विरोध-प्रदर्शन अब देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुके हैं। इस आंदोलन की वजह प्रश्नपत्र लीक, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित सख्ती और जवाबदेही की लगातार उठ रही मांगें हैं।
विपक्षी पार्टियां भी इस मांग में शामिल हो गई हैं और वे प्रधान के इस्तीफ़े के साथ-साथ संसद में इस मुद्दे पर बहस की मांग कर रही हैं।
जब 2024 में नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोपों और यूजीसी-नेट प्रश्न पत्र के लीक होने की पुष्टि के बाद शिक्षा मंत्रालय इसी तरह के विवाद में फंसा था, तो एनटीए के तत्कालीन महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह को हटा दिया गया था।
स्टील मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नियुक्त किए जाने से पहले सिंह को लगभग चार महीने तक अनिवार्य प्रतीक्षा पर रखा गया था। बाद में उन्हें उनके छत्तीसगढ़ कैडर में वापस भेज दिया गया।