नयी दिल्ली: चार जून (ए)
अदालत ने मामले में बजाज की गिरफ्तारी को ‘‘वैध और न्यायसंगत’’ बताया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट भानु प्रताप सिंह ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें आरोपी से चार दिन तक हिरासत में पूछताछ का अनुरोध किया गया था।
न्यायाधीश ने बजाज की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती देने वाली दलीलों को खारिज करते हुए कहा, ‘‘आरोपी के खिलाफ आजीवन कारावास वाले दंडनीय अपराध करने के गंभीर आरोपों को देखते हुए, यह न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि आरोपी लवकेश बजाज की गिरफ्तारी वैध और न्यायसंगत है।’’
पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार किया और गैर इरादतन हत्या समेत कई आरोपों के तहत उस पर मामला दर्ज किया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 326(जी) (आग लगाकर नुकसान पहुंचाना), 324(5) (संपत्ति को नुकसान पहुंचाना), 125(ए) (मानव जीवन और सुरक्षा को खतरे में डालने वाले लापरवाही से किए गए कृत्य के लिए दंड), 125(बी) (लापरवाही से गंभीर चोट पहुंचाना) और 287 (आग के संबंध में लापरवाही भरा आचरण) के तहत मामला दर्ज किया है।
बुधवार सुबह ‘फ्लरिश स्टे बी एंड बी’ में आग लग गई, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग झुलस गए। इस हादसे में जान गंवाने वाले कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो पास के अस्पतालों में इलाज करा रहे अपने रिश्तेदारों की तीमारदारी के लिए आए थे और होटल में ठहरे हुए थे।
अदालत ने पुलिस की ओर से पेश अभियोजक की इस दलील पर गौर किया कि ‘‘फ्लोरिश स्टे के संचालन में लगे सभी श्रमिकों, कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के विवरण का पता लगाने और उसकी पुष्टि करने’’ के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
अभियोजन ने यह भी दलील दी कि प्रारंभिक जांच में लेखाकार जय मिश्रा और होटल प्रबंधक राकेश की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी, इसलिए उन्हें ढूंढने और गिरफ्तार करने के लिए बजाज से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।
अभियोजक ने कहा कि पुलिस के लिए होटल के स्वामित्व और संचालन से संबंधित दस्तावेजों को बरामद और जब्त करना भी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी को होटल के संचालन से संबंधित अतिथि रजिस्टर, बुकिंग रिकॉर्ड, ऑनलाइन बुकिंग विवरण, वित्तीय और बैंक खाता लेन-देन के विवरण प्राप्त करने होंगे।
बजाज के वकील नितिन अहलावत और प्रीति यादव ने हिरासत की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी से कोई बरामदगी नहीं की जानी है और पुलिस को पहले से ही सभी आवश्यक तथ्य पता हैं।
अपने आदेश में अदालत ने कहा, ‘‘चूंकि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, इसलिए न्यायालय का मानना है कि घटना से संबंधित प्रासंगिक तथ्यों का पता लगाने और अनिवार्य कानूनों के अनुपालन में कथित चूक की पुष्टि करने के लिए आरोपी से पुलिस हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।’’
अदालत ने कहा कि जांच के दौरान जिन व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है, उन्हें ढूंढने, पता लगाने और गिरफ्तार करने के लिए भी आरोपी की पुलिस हिरासत आवश्यक है।
हालांकि, अदालत ने बजाज के वकीलों को प्रतिदिन शाम 5 से 6 बजे के बीच पुलिस थाने के अंदर उनसे मिलने की अनुमति दी।