नयी दिल्ली: 22 जुलाई (ए)
उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े समेत उनकी सभी मांगें पूरी तरह जायज़ हैं और उन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
गांधी ने कहा कि विरोध कर रहे छात्र आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि वे केवल ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहते हैं जो कारगर हो और निष्पक्ष हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से छात्रों से माफ़ी मांगने और छात्रों पर हुए हमले के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की मांग का भी समर्थन किया।
यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था न केवल धांधली से भरी है, बल्कि यह आम लोगों की पहुंच से बाहर भी है।
प्रेस वार्ता की शुरुआत में सोमवार को हुए ‘संसद चलो’ प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित ‘पुलिस बर्बरता’ का एक वीडियो दिखाया गया।
पुलिस की कार्रवाई का जिक्र करते हुए गांधी ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि हमारे छात्रों के साथ ऐसा क्यों हो रहा है। उन्होंने ऐसा क्या किया है कि सुरक्षा बल उन पर हथियार तान रहे हैं, उन्हें पीटा जा रहा है और उन पर ज़ुल्म किया जा रहा है?’’
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘वे शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे हैं और अपना हक मांग रहे हैं जो यह देश उन्हें देने का जिम्मेदार है। वे बस इस देश के छात्रों के तौर पर यह कह रहे हैं कि- ‘हम एक ऐसी शिक्षा प्रणाली के हकदार हैं जो निष्पक्ष हो’।’’
लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि बच्चों ने आत्महत्याएं की हैं, वे बहुत ज़्यादा तनाव से गुज़रते हैं और यह इस देश में एक जायज और बहुत गंभीर समस्या है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह बात सबको बहुत स्पष्ट है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था, जिसे दुनिया की सबसे अच्छी शिक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता था, वह अब धांधली वाली प्रणाली बन गई है।’’
उन्होंने दावा किया कि पिछले दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं।
गांधी ने कहा, ‘‘हर महीने लाखों छात्रों से कहा जाता है कि आपने जो तनाव झेला है, उसे आपको फिर से झेलना होगा और ‘हमें कोई फर्क नहीं पड़ता’।’’
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था के बिगड़ने से 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘152 बार पेपर लीक होने के बावजूद किसी को सजा नहीं हुई है।’’
गांधी ने कहा, ‘‘कुछ लोग हमारी शिक्षा व्यवस्था और हमारे छात्रों की जिंदगी बर्बाद कर रहे हैं।’’
गांधी ने दावा किया कि परिवारों का सालाना परीक्षाओं का खर्च 1.32 लाख करोड़ रुपये है, जो सरकार द्वारा आवंटित 1.4 लाख करोड़ रुपये के शिक्षा बजट के लगभग बराबर है।
सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ‘‘यह इन परिवारों के साथ सरासर लूट है, और उनसे लूटने के बाद आप उन्हें बताते हैं कि पेपर लीक हो गया है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों के विरोध का दूसरा कारण यह है कि शिक्षा हासिल करने के बाद, छात्रों से कहा जाता है कि जो दरवाजे उनके लिए खुले थे, वे अब बंद हो गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘तो विनिर्माण बंद है, उद्यमिता बंद है, कॉर्पोरेट नौकरियां बंद हैं, सार्वजनिक क्षेत्र बंद है। उनके पास सिर्फ सरकारी नौकरी का विकल्प बचता है। फिर आप व्यवस्था में धांधली करते हैं और इसे इतना महंगा बना देते हैं कि कोई इसका खर्च नहीं उठा न सके। हम छात्रों की बात से शत प्रतिशत सहमत हैं। इसके कुछ नतीजे तो निकलने ही चाहिए।’’
गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें जायज हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान, जो भ्रष्टाचार के लिए जाने जाते हैं, उन्हें उनके पद से हटा दिया जाना चाहिए।’’
गांधी ने कहा कि उन्होंने साबित कर दिया है कि वह इस सिस्टम को चलाने में अक्षम हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दूसरी मांग यह है कि जिन लोगों ने भी छात्रों पर उंगली उठाई है, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए और जो कुछ हुआ है, उसके लिए प्रधानमंत्री मोदी छात्रों से माफ़ी मांगें।’’
गांधी ने कहा, ‘‘हम इन मांगों और सड़कों पर उतरे हर एक छात्र का पूरी तरह समर्थन करते हैं।’’
उनकी यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई है, जब नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना देने पर पुलिस ने राहुल, प्रियंका और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को बलपूवर्क वहां से हटा दिया था।
उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में अचानक दिए गए इस धरने से सरकार में हड़कंप मच गया और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन को विपक्षी नेताओं से बातचीत करने और उन्हें उस संवेदनशील जगह से हटने को मनाने के लिए भेजा।
मंत्री के साथ गांधी की बातचीत कुछ मिनट तक चली, जिसके बाद बातचीत बेनतीजा रहने पर सिंह और गृह सचिव वहां से चले गए।
सिंह के धरना स्थल से जाने के कुछ ही देर बाद, शाम को पुलिस ने गांधी और अन्य नेताओं को बलपूर्वक वहां हटा दिया और हिरासत में ले लिया।
हिरासत में लिए जाने के बाद राहुल गांधी को मॉडल टाउन के छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। प्रियंका गांधी और कुछ अन्य सांसदों को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया, जहां कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे मिलने पहुंचीं। कुछ घंटों बाद उन्हें भी रिहा कर दिया गया।
कुछ अन्य सांसदों और नेताओं को किंग्सवे कैंप थाने ले जाया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।
रिहाई के बाद राहुल गांधी ने एक वीडियो में कहा कि जब यह साफ हो गया कि सरकार का छात्रों के मुद्दे पर चर्चा कराने का कोई इरादा नहीं है, तो उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने का फैसला किया था।