लखनऊ: 25 जून (ए)
उनकी टिप्पणी हाल में लखनऊ में अलीगंज की एक इमारत में आग लगने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू किए गए राज्यव्यापी अभियान के बीच आई है। इस अग्निकांड में 15 लोगों की जान चली गई थी। अधिकारियों ने राज्य भर में कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण तेज कर दिया है, कई संस्थानों को सील कर दिया है और अग्नि सुरक्षा तथा भवन नियमों के कथित उल्लंघन के लिए नोटिस जारी किए हैं।
बुधवार रात ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यादव ने कहा, ‘अब भाजपा सरकार ‘कोचिंग बंदी’ ले आई।”
उन्होंने कहा, ”भाजपा अपना भ्रष्टाचार छिपाने के लिए जनता को सुरक्षा मानकों के नाम पर परेशान कर रही है। माना कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए लेकिन क्या पिछले 10 साल से सरकार सो रही थी। सरकार के पास एक दिन में इतना स्टाफ कहां से आया कि पूरे प्रदेश में हज़ारों लोगों को जांच के बाद नोटिस थमा दिया गया।”
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे आरोप लगाया, ”सच्चाई यह है कि अब सुरक्षा मानकों और अनुमति आदि के नाम पर करोड़ों रुपये की उगाही का खेल शुरू हो गया है। भाजपाई आपदा में सम्पदा ढूंढ़ लेते हैं।”
यादव ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर कार्रवाई के प्रभाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ”कोचिंग संस्थानों को बंद करने से, उन लाखों बच्चों का क्या होगा जो तैयारी कर रहे हैं। इससे अच्छा तो नोटिस देकर सुरक्षा मानकों के लिए तुरंत व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएं, जिससे किराये पर रह रहे बच्चों के कोर्स समय पर ख़त्म हो सकें। इस तरह की ‘कोचिंग बंदी’ से तो महंगाई से परेशान लोगों के ख़र्चे और भी बढ़ जाएंगे।”
सत्ताधारी पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, ”भाजपा अगर अपनी ‘भ्रष्टाचार बंदी’ कर दे तो हर समस्या का हल निकल आए।”
राज्य सरकार ने 22 जून को लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक इमारत में आग लगने के बाद प्रवर्तन अभियान शुरू किया था।
इससे पहले बुधवार को, यादव ने आरोप लगाया था कि अगर अधिकारियों ने समय पर सुरक्षा मानकों को लागू किया होता और आपातकालीन फोन कॉल पर तुरंत कार्रवाई की होती तो अलीगंज अग्निकांड में होने वाली मौतों को टाला जा सकता था।
उन्होंने पीड़ितों के परिवारों के लिए बढ़े हुए मुआवजे और दीर्घकालिक सहायता की भी मांग की थी।