
अमेरिका ने जॉर्डन में अपने सैनिकों पर हुए हमले के लिए ईरान के अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड को जिम्मेदार ठहराया है।
यूएस सेंट्रल कमांड’ (सेंटकॉम) ने कहा कि इन हवाई हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित करने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना है। युद्ध शुरू होने से पहले इस जलमार्ग से दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति होती थी।
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि शनिवार देर रात करीब डेढ़ बजे दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित सिरिक इलाके को निशाना बनाया गया।
ये नए हमले ऐसे समय हुए, जब अमेरिकी सेना ने युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार शुक्रवार को ईरान की सैन्य कार्रवाई में जॉर्डन स्थित अपने सैन्य अड्डे पर ड्रोन और मिसाइल हमले में अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि की। हालांकि, मारे गए सैनिकों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई और सेंटकॉम ने इस संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी देने से इनकार कर दिया।
युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 430 से अधिक सैनिक घायल हुए हैं।
पड़ोसी देश इराक में रविवार तड़के इरबिल के निकट स्थित कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी (ईरानी कुर्द असंतुष्ट संगठन) के एक ठिकाने पर ड्रोन हमला किया गया। संगठन के सैन्य अधिकारी रेबाज शरीफी के अनुसार, इस हमले में उसके आठ सदस्य घायल हो गए।
इराक के अर्ध-स्वायत्त उत्तरी कुर्द क्षेत्र की राजधानी इरबिल के निवासियों ने भी रविवार सुबह हवाई रक्षा प्रणालियों की कार्रवाई के दौरान कई धमाकों की आवाजें सुनीं।
पिछले चार दिनों में इरबिल पर कई बार ड्रोन हमले हुए हैं। ये हमले ऐसे समय हो रहे हैं, जब इराक के नए प्रधानमंत्री अली अल-जायदी हाल ही में अमेरिका की यात्रा पर गए थे और दूसरी ओर अमेरिका तथा ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अब तक किसी भी संगठन ने इन हमलों की जिम्मेदारी नहीं ली है। हालांकि, अतीत में ईरान और उसके समर्थित इराकी मिलिशिया समूह इस कुर्द क्षेत्र पर हमले करते रहे हैं, जहां अमेरिकी सैनिकों के साथ-साथ ईरानी कुर्द असंतुष्ट संगठन भी सक्रिय हैं।
वहीं, शनिवार को अमेरिकी सेना द्वारा अपने सैनिकों की मौत की घोषणा से कुछ मिनट पहले ही ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका इस्लामिक गणराज्य पर हमले जारी रखता है तो उसे ‘‘ऐसा सबक सिखाया जाएगा, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगा।’’
ईरान के एक वरिष्ठ वार्ताकार ने यह भी घोषणा की कि तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए अंतरिम समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं किया। अंतरिम समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करना था।
छह सदस्यीय खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के महासचिव जासेम मोहम्मद अल-बुदैवी ने नागरिक ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों को लेकर ईरान पर युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया है। इससे पूर्व
ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले शुरू करने का निर्देश दिया, जो वाशिंगटन द्वारा अपने आक्रमणों को फिर से शुरू करने के बाद से आठवां हमला था।
सेंटकॉम के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को धमकाने की ईरान की क्षमता को और कमजोर करना था। सेंटकॉम ने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को “तत्काल दंडित” करना था। इस बीच ईरान की
आईआरजीसी ने कुवैत के कैंप आरिफजान में स्थित अमेरिकी सैन्य सहायता केंद्र पर हमला करने और अली अल सलेम हवाई अड्डे पर एक रडार सुविधा को नष्ट करने का दावा किया है।
बाद में, कुवैत की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन ने कहा कि उसकी एक तेल सुविधा पर “कई ईरानी हमले” हुए हैं, जिससे काफी नुकसान हुआ है और कई लोग घायल हुए हैं।
कुवैत के अलावा, ईरानी मीडिया ने बताया कि आईआरजीसी ने बहरीन में भी एक स्थान पर हमला किया, जिसमें शेख ईसा एयर बेस – अमेरिकी लड़ाकू जेट विमानों का एक अड्डा – और एक खुफिया डेटा सेंटर शामिल है।
ईरानी सरकारी टेलीविजन के अनुसार, 18 जुलाई की सुबह जॉर्डन में अमेरिकी अल अजराक सैन्य अड्डे पर हुए हमले में, आईआरजीसी ने कम से कम दो लड़ाकू जेट और तीन अन्य अमेरिकी विमानों को नष्ट कर दिया।