प्रयागराज: 17 मई (ए)
वाराणसी में नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी के दौरान बचा हुआ भोजन गंगा में फेंकने के आरोपी पांच लोगों को जमानत देते हुए न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ला ने कहा, “आरोपी अपने कृत्य के लिए खेद व्यक्त कर चुके हैं और उनके परिवारों ने भी समाज को हुई पीड़ा पर अफसोस जताया है।”
अदालत ने कहा, “मामले के समस्त तथ्यों और परिस्थितियों, आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड न होने, अब तक जेल में बिताई गई अवधि और खेद व्यक्त किए जाने के मद्देनजर प्रथम दृष्टया जमानत दी जानी चाहिए।”
15 मई को पारित आदेश में न्यायमूर्ति शुक्ला ने आरोपी मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल आफरीदी, मोहम्मद तौसीफ अहमद और मोहम्मद अनस को जमानत दी।
मामला मुस्लिम समुदाय के सदस्यों द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी से जुड़ा है।
अदालत ने कहा, “ मुस्लिम समुदाय के सदस्यों पर उक्त इफ्तार पार्टी के दौरान मांसाहारी भोजन किए जाने और बचा हुआ खाना गंगा नदी में फेंके जाने का आरोप है। अदालत का मानना है कि यह कृत्य हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला माना जा सकता है।”
17 मार्च 2026 से जेल में बंद आरोपियों ने अपने कृत्य पर खेद जताते हुए भविष्य में ऐसा कार्य दोबारा नहीं करने का आश्वासन दिया है।
इसी मामले में न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने 15 मई को तीन अन्य आरोपियों मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान को भी जमानत दे दी थी। प्राथमिकी 16 मार्च को वाराणसी में भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जिसमें कहा गया था कि इस घटना से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने 15 मार्च को गंगा में नाव पर रमजान का रोजा खोला, मांसाहारी भोजन किया और बचा हुआ भोजन नदी में फेंक दिया।
आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिनमें पूजा स्थल को अपवित्र करने और धार्मिक भावनाएं भड़काने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
वाराणसी की एक सत्र अदालत ने एक अप्रैल को आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के उद्देश्य से यह कार्य किया।