नयी दिल्ली/ न्यूयॉर्क: 18 मई (ए)
अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि वे अब इन आरोपों को आगे बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं।
इसलिए मामले को “विद प्रेजुडिस” खारिज किया जा रहा है। इसका मतलब है कि यह केस दोबारा नहीं खोला जा सकेगा।
यह मामला 2024 के अंत में दर्ज हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अडानी समूह ने भारत में सोलर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े अनुबंध हासिल करने के लिए कथित तौर पर 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत योजना बनाई और अमेरिकी निवेशकों से जानकारी छिपाई। हालांकि अडानी समूह लगातार इन आरोपों को निराधार बताता रहा।पिछले कुछ दिनों में अडानी समूह से जुड़े कई अमेरिकी नियामकीय मामलों का भी निपटारा हुआ है। अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने निवेशकों को दी गई सूचनाओं से जुड़े सिविल आरोपों का समझौता किया था, जिसके तहत गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर देने पर सहमति जताई थी। दोनों ने किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया।अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में कहा कि उसने मामले की समीक्षा के बाद यह तय किया है कि इन आपराधिक आरोपों पर आगे संसाधन खर्च करना उचित नहीं है। अदालत ने इसके बाद अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोग को स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश दिया।