कोलकाता: नौ मई (ए)
स्वतंत्रता के बाद पहली बार ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड भाजपा सरकार के शपथग्रहण का गवाह बना।
शपथग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) शासित राज्यों के मुख्यमंत्री विशाल मंच पर मौजूद थे। ‘‘जय श्री राम’’ के उद्घोष, ढोल की थाप और लहराते भगवा झंडों के बीच राज्यपाल आर. एन. रवि ने अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर पहुंचने के बाद जनादेश के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए लोगों की ओर मुख करके घुटनों के बल झुककर जैसे ही हाथ जोड़े और मंच पर नत मस्तक हुए, ऐतिहासिक स्थल पर एकत्र भाजपा के हजारों समर्थकों ने जोरदार नारों और तालियों से उनका स्वागत किया।
भवानीपुर और नंदीग्राम, दोनों विधानसभा क्षेत्रों से जीत हासिल करने वाले तथा भाजपा के आक्रामक चुनाव अभियान का चेहरा बनकर उभरे अधिकारी ने सबसे पहले शपथ ली। उनके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पार्टी की प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष ने मंत्री के रूप में शपथ ली। भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निशीथ प्रामाणिक को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई।
यह छह सदस्यीय मंत्रिमंडल सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की भाजपा की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इसमें ब्राह्मण, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), जनजातीय, मतुआ और राजबंशी समुदायों को प्रतिनिधित्व दिया गया है।
शुभेंदु अधिकारी ब्राह्मण हैं, घोष अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, अग्निमित्रा पॉल कायस्थ हैं, कीर्तनिया मतुआ समुदाय का प्रमुख चेहरा हैं, टुडू जंगलमहल के जनजातीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं जबकि प्रामाणिक उत्तर बंगाल के प्रभावशाली राजबंशी नेता माने जाते हैं।
भाजपा के पहले मंत्रिमंडल में दो मंत्री उत्तर बंगाल और तीन दक्षिण बंगाल से हैं। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में अपना समर्थन मजबूत करने की पार्टी की कोशिश रेखांकित होती है।
मंत्रियों की पहली सूची में कोलकाता से किसी प्रतिनिधि को जगह नहीं मिली जबकि इस शहर ने बंगाल की कुछ सबसे बड़ी राजनीतिक हस्तियां और मुख्यमंत्री दिए हैं।
सूत्रों ने बताया कि भाजपा सरकार के बाकी मंत्रियों को सोमवार को राजभवन में शपथ दिलाए जाने की संभावना है। नए मंत्रिमंडल की पहली बैठक भी उसी दिन हो सकती है। मंत्रियों के विभागों की घोषणा अभी नहीं की गई है।
ब्रिगेड परेड ग्राउंड को कभी वाम दलों का वैचारिक गढ़ माना जाता था और बाद में तृणमूल कांग्रेस ने भी इसे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के प्रमुख मंच के रूप में इस्तेमाल किया। शनिवार को यही मैदान स्वतंत्रता के बाद पश्चिम बंगाल की पहली भाजपा सरकार के शपथग्रहण का स्थल बना। भाजपा खेमे ने इसे ‘‘डबल इंजन’’ सरकार के तहत ‘‘सोनार बांग्ला’’ की शुरुआत के रूप में पेश किया।
भगवा गमछा पहने और पार्टी के झंडे लिए हजारों कार्यकर्ता सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर जुटने लगे। बड़े एलईडी स्क्रीन पर मोदी और अधिकारी के चुनावी भाषण दिखाए गए।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के साथ ही मैदान क्षेत्र में ‘‘भारत माता की जय’’ के नारे गूंज उठे।
भाजपा ने हाल में हुए चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीट हासिल कीं। इसके साथ ही राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत हुआ और पूर्वी भारत में भाजपा ने अपनी अब तक की सबसे बड़ी चुनावी सफलता हासिसल की।
पश्चिम बंगाल में वाम-उदारवादी राजनीतिक संस्कृति की गहरी जड़ें होने के कारण भाजपा के लिए कभी बेहद कठिन राजनीतिक क्षेत्र माने जाने वाले राज्य में पार्टी का उदय पिछले कई वर्षों में आक्रामक जमीनी विस्तार, ध्रुवीकरण वाले अभियानों और प्रतिद्वंद्वी खेमों से दलबदल के माध्यम से गति पकड़ता रहा तथा अंतत: पार्टी ने जीत हासिल कर शनिवार को सत्ता संभाल ली।
मंत्रियों के पहले समूह में उन प्रमुख सामाजिक और चुनावी क्षेत्रों को महत्व देने की भाजपा की कोशिश दिखाई दी, जिन्होंने उसकी जीत में योगदान दिया।
घोष खड़गपुर सदर सीट से फिर विधानसभा पहुंचे हैं। उन्होंने यह सीट पहली बार 2016 में जीती थी। बाद में वह 2019 में संसद पहुंचे लेकिन वह 2024 के आम चुनाव में निर्वाचन क्षेत्र बदले जाने के बाद बर्धमान-दुर्गापुर सीट से हार गए थे।
फैशन डिजाइनर से नेता बनीं अग्निमित्रा पॉल 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा में शामिल हुईं और पार्टी में तेजी से आगे बढ़ते हुए बंगाल में भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष बनीं। उन्होंने आसनसोल दक्षिण सीट बरकरार रखी जिसे उन्होंने पहली बार 2021 में जीता था।
अशोक कीर्तनिया ने बनगांव उत्तर सीट बरकरार रखी जिससे बांग्लादेश की सीमा से लगे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मतुआ क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई।
पेशे से शिक्षक क्षुदिराम टुडू जंगलमहल क्षेत्र से जनजातीय चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्होंने शुरुआती चुनावी हारों के बाद रानीबांध सीट जीती।
निशीथ प्रामाणिक 2019 में कूचबिहार से लोकसभा पहुंचे थे और बाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री बने। वह माथाभांगा विधानसभा सीट जीतकर राज्य की राजनीति में लौटे हैं।
भाजपा के लिए शनिवार का शपथ ग्रहण समारोह महज सत्ता परिवर्तन नहीं था बल्कि बंगाल की राजनीति में वर्षों से जारी उस लंबी कोशिश की परिणति था जिसके तहत पार्टी ने राज्य के गहरे वैचारिक एवं राजनीतिक गढ़ों में सेंध लगाई और पार्टी के शासन के नए अध्याय की ब्रिगेड परेड ग्राउंड से शुरुआत की।