लखनऊ: तीन अक्टूबर (ए) उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की नयी टीम के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में एकजुटता बनाए रखना और समाजवादी पार्टी (सपा) के साथ सुचारू गठबंधन कायम रखना दो बड़ी चुनौतियां हो सकती हैं। कांग्रेस नेताओं का ऐसा मानना है।
कांग्रेस ने शुक्रवार को अपनी प्रदेश इकाई में नेतृत्व परिवर्तन करते हुए भूमिहार समुदाय से आने वाले अजय राय की जगह ब्राह्मण समुदाय से आने वाली आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। पार्टी ने सहारनपुर से अपने सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष भी नियुक्त किया। माना जा रहा है कि इस कदम का उद्देश्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की पहुंच बढ़ाना है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के साथ गठबंधन किया है। पिछले तीन वर्ष से अजय राय प्रदेश में पार्टी के सबसे सक्रिय चेहरों में से रहे हैं। ऐसे में मोना एवं मसूद के सामने यह सुनिश्चित करने की भी चुनौती होगी कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी बंटी हुई नजर न आए।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के निवर्तमान अध्यक्ष अजय राय ने प्रदेश में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी देने के लिए शनिवार को पार्टी नेतृत्व का आभार जताया।
उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘मुझ जैसे एक सामान्य कार्यकर्ता को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने के लिए मैं राहुल गांधी जी एवं कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व का जीवन भर आभारी रहूंगा। लड़ाई अब भी जारी है। नए अध्यक्ष सहित सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। लड़ेंगे, जीतेंगे! हर-हर महादेव!’’
अगस्त 2023 से उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे राय पहले ही वाराणसी की पिंडरा विधानसभा सीट से 2027 का चुनाव लड़ने की योजना जाहिर कर चुके हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वह सपा के साथ चुनाव-पूर्व गठबंधन को लेकर बहुत उत्सुक नहीं थे।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का चुनावी ग्राफ 1989 के बाद से लगातार गिरा है। राज्य में पार्टी आखिरी बार उसी वर्ष सत्ता में थी।
राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी की बेटी मोना के सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ अच्छे राजनीतिक संबंध बताए जाते हैं।
एक वरिष्ठ पार्टी नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अब ज्यादातर लोगों को उम्मीद है कि पार्टी में एकता बनी रहेगी और सम्मानजनक गठबंधन होगा। नयी टीम के लिए यह चुनौती भी है और अवसर भी।’’
कुछ नेताओं का मानना है कि मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से सपा के साथ तल्खी बढ़ सकती है, क्योंकि सहारनपुर के सांसद हाल में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ जुबानी जंग में उलझे रहे हैं।
मसूद ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘पार्टी मुझसे जो भी करवाना चाहेगी, मैं करूंगा।’’
उन्होंने सपा के साथ गठबंधन को लेकर पूछे गए सवालों का सीधा जवाब नहीं दिया।
पार्टी ने चौधरी वीरेंद्र सिंह को उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया है। अब तक यह जिम्मेदारी मोना के पास थी।
देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।*
इन नियुक्तियों के जरिए कांग्रेस ने सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी ने ब्राह्मण समुदाय से आने वाली मोना को अध्यक्ष, मुस्लिम नेता मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है, जबकि उत्तर प्रदेश के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम दलित नेता हैं।
मोना ने कहा कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन उत्तर प्रदेश में अच्छा प्रदर्शन करे, इसके लिए उन्हें तुरंत जमीन पर उतरना होगा।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 37 सीट जीती थीं। इनमें फैजाबाद सीट भी शामिल थी, जिसके अंतर्गत अयोध्या आता है। कांग्रेस ने छह सीट जीती थीं। दोनों दलों के गठबंधन ने भाजपा को 33 सीट और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को कुल 36 सीट तक सीमित कर दिया था।
मोना ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘हम अपना सर्वश्रेष्ठ देंगे और पार्टी ने जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरा करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे परिवार की चार पीढ़ियों की विरासत कांग्रेस पार्टी में रही है और मुझे इसे आगे बढ़ाने का मौका मिला है। इसके लिए मैं सचमुच आभारी हूं। हमारे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मेरे बड़े भाई की तरह हैं। मुझे हमेशा उनका मार्गदर्शन और स्नेह मिला है… कांग्रेस पार्टी कभी चुनौतियों से नहीं डरी है।’’
अखिलेश यादव के आठ अक्टूबर को अयोध्या में प्रस्तावित कार्यक्रम के बारे में पूछे जाने पर मोना ने कहा कि किसी पार्टी के प्रमुख के तौर पर वह किसी भी आयोजन में शामिल होने के लिए कहीं भी जा सकते हैं।
मसूद की नियुक्ति के बारे में मोना ने कहा कि कांग्रेस के लिए किसी नेता की जाति या धर्म मायने नहीं रखता।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा जैसी पार्टियों के लिए धर्म, जाति और समुदाय राजनीति का विषय हैं। कांग्रेस के लिए ऐसा कभी नहीं रहा। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक कांग्रेस ने हमेशा सभी को प्रतिनिधित्व देने और सबको साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया है।’’
मोना ने कहा कि कांग्रेस आज भी हर समुदाय, धर्म और जाति को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य 2027 है और इसे हासिल करने के लिए हम सभी को साथ लेकर चलेंगे।’’
इस बीच, सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर ने कांग्रेस में हुए फेरबदल को पार्टी का ‘‘आंतरिक मामला’’ बताया।
भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता दिनेश प्रताप सिंह ने दावा किया कि नेतृत्व परिवर्तन से यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस अपनी प्रदेश इकाई के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं थी।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अगर चुनाव को लड़ाई माना जाए और चुनाव के समय ही आप अपना मुख्य सेनापति बदल दें तो नतीजा क्या होगा, यह समझना आसान है। उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष को बदलकर कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि उसे राय पर भरोसा नहीं है।
