हैदराबाद: तीन अक्टूबर (ए) अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आलोचना करते हुए शनिवार को कहा कि गणेश चतुर्थी के उत्सव के तहत गणेश प्रतिमाओं का ‘विसर्जन’ हो चुका है और अब मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का ‘विसर्जन’ होना बाकी है।
मीडिया में आई उन खबरों का हवाला देते हुए कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से हटाए गए मतदाताओं द्वारा नाम शामिल किए जाने के लिए दायर 38 लाख अपीलें न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं और इनके निपटारे में 10-12 साल लग सकते हैं, उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी बड़ी संख्या में आवेदकों को इतने लंबे समय तक इंतजार करना पड़ेगा।
उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पूरे देश में गणेश विसर्जन हो चुका है। अब ज्ञानेश कुमार के विसर्जन की बारी है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि जब एसआईआर की शुरुआत हुई थी, तब इसे मतदाता सूची के शुद्धीकरण की प्रक्रिया बताया गया था, लेकिन अब यह सामने आया है कि यह समावेशी प्रक्रिया के बजाय नाम हटाने की प्रक्रिया बन गई है।
प्रकाश राज ने कहा कि उन्होंने विभिन्न जिलों का 10-दिवसीय दौरा कर लोगों से मुलाकात की और उन्हें बताया गया कि केवल इसलिए उनके नाम मतदाता सूची से ‘‘हटा दिए गए’’, क्योंकि जब बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) उनके घर पहुंचे, तब वे घर में मौजूद नहीं थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि काम के सिलसिले में दूसरे स्थानों पर गये दिहाड़ी मजदूरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिये गये हैं।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या ‘मन की बात’ करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले से ही एसआईआर की प्रक्रिया के बारे में लोगों को समझाया था।
प्रकाश राज ने कहा, ‘‘हमारी मांग है कि एसआईआर की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और इसे पूरी तरह रद्द किया जाये।’’
इस बीच, भाजपा की तेलंगाना इकाई के मुख्य प्रवक्ता एन. वी. सुभाष ने सीईसी के खिलाफ की गई प्रकाश राज की “अपमानजनक” टिप्पणी की कड़ी आलोचना की।
सुभाष ने एक बयान में कहा, ‘‘प्रकाश राज को निर्वाचन आयोग की आलोचना करने का अधिकार हो सकता है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त की तुलना प्रतिमा विसर्जन से करना राजनीतिक आलोचना की सीमा से आगे बढ़कर एक संवैधानिक संस्था के प्रति अनादर है। लोकतंत्र में उपहास नहीं, बल्कि सार्थक बहस की आवश्यकता होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर प्रकाश राज को एसआईआर प्रक्रिया को लेकर आपत्ति है, तो उन्हें ‘भड़काऊ बयानबाजी’ करने के बजाय उचित मंच के समक्ष तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए।’’
