मुंबई: पांच अक्टूबर (ए) शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) ने सोमवार को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की आलोचनात्मक टिप्पणियों का समर्थन किया।
भुइयां ने रविवार को हैदराबाद के नलसार विश्वविद्यालय में कहा कि लाखों भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से “वंचित” करने वाली कोई भी प्रक्रिया “मूल रूप से मनमानी” और संवैधानिक व्यवस्था के “खिलाफ” है।
टिप्पणियों का समर्थन करते हुए राकांपा (शप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा कि लाखों लोगों को मनमाने ढंग से मताधिकार से वंचित करना नागरिकों के मतदान के मौलिक अधिकार के खिलाफ है।
क्रास्टो ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की दलीलें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और भारत निर्वाचन आयोग के कथित गलत कामों को छिपाने की कोशिश का संकेत थीं।
क्रास्टो ने बताया, “एसआईआर मुद्दे पर न्यायमूर्ति भुइयां का बयान हमारे संविधान और लोकतंत्र को कायम रखता है। मतदाताओं को मनमाने ढंग से मताधिकार से वंचित करना उनके मतदान के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।”
न्यायमूर्ति भुइयां ने ‘नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ’ में आयोजित 19वीं न्यायमूर्ति बोध राज साहनी मेमोरियल मूट कोर्ट प्रतियोगिता के समापन कार्यक्रम में कहा कि भारत का संविधान नागरिकों को दो वर्गों में नहीं बांटता, जिनमें से एक वर्ग मताधिकार प्राप्त हो और दूसरा मताधिकार से वंचित हो।
उन्होंने कहा कि व्यापक पैमाने पर भारतीय नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का सीधा उल्लंघन होगी।
विपक्षी दल और कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा), साथ ही नागरिक संस्थाएं कथित तौर पर एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सत्तारूढ़ भाजपा और निर्वाचन आयोग ने एसआईआर का बचाव करते हुए कहा है कि यह प्रक्रिया सभी कानूनों और संवैधानिक मानदंडों का पालन करते हुए की जा रही है।
