विदेश मंत्री जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो मुंबई में अहम वार्ता करेंगे

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: 20 अक्टूबर (ए) अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार से भारत की तीन दिवसीय यात्रा शुरू करेंगे। इस दौरान वह ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर और पश्चिम एशिया संकट पर अपने विचार साझा करेंगे।इस साल रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा है। अमेरिकी विदेश मंत्री की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है।

इससे पहले मई में अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी तथा ‘क्वाड’ (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री के साथ एक बड़ा कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है। उनकी 20 से 22 अक्टूबर तक की इस यात्रा के दौरान भारत-अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना है।

मंगलवार दोपहर मुंबई में जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बैठक में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार रुबियो आज अपराह्न 2:15 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे।

जयशंकर से मुलाकात के अलावा रुबियो का मुंबई में 26/11 आतंकी हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित करने का भी कार्यक्रम है। इस हमले में 160 से अधिक लोगों की जान गई थी जिनमें छह अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे।

अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह कहा था, ‘‘चर्चा में ऊर्जा, व्यापार और निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों और आपसी हित के अन्य क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख पहलुओं को शामिल किए जाने की उम्मीद है।’’

दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है।

जायसवाल ने कहा, ‘‘यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बनाए रखने और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी।’’

रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर जाएंगे।

अपनी इस यात्रा से पहले रुबियो ने उज्बेकिस्तान में कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के ‘‘बेहद करीब’’ है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका द्वारा शुल्क में छूट देने का फैसला इसी से जुड़ा है।

पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और रूसी तेल के पांच सबसे बड़े खरीदारों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया था।

रुबियो ने कहा, ‘‘हम अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी छूट या इस तरह के अन्य मामलों पर कोई फैसला लेते हैं तो हम इन बातों को भी ध्यान में रखते हैं।’’

भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से ही एक प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य शुल्क संबंधी विवादों को सुलझाना, गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाना और दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच को बढ़ाना है।

भारत चाहता है कि अमेरिकी बाजार में उसके सामान पर उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर शुल्क दरें लागू हों।

जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अब समझौते के अंतिम चरण के करीब पहुंच रही है।

पिछले साल अमेरिका द्वारा भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए जाने और ट्रंप द्वारा मई 2025 में भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव को कम करने में अपनी भूमिका के दावे किए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में काफी गिरावट आई थी। ट्रंप के इन दावों पर भारतीय अधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अमेरिका की नयी आव्रजन नीति और एच-1बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले ने भी भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट में योगदान दिया।

इसके अलावा, जब अमेरिका ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और विप्रो जैसी प्रमुख वैश्विक और भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रीन-कार्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम को सीमित करने का फैसला किया तो दोनों देशों के संबंधों में और अधिक तनाव आ गया।