लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि होंगे अगले सीडीएस

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नयी दिल्ली: नौ मई (ए) लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि को देश का नया प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) नियुक्त किया गया है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उस महत्वाकांक्षी ‘‘थिएटराइजेशन’’ योजना को लागू करने की होगी, जिसका मकसद तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि को पाकिस्तान और चीन मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है।

वह पिछले साल 31 जुलाई को थलसेना उपप्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्हें पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर सहित दो कोर की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त है।

रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को प्रमुख रक्षा अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो सैन्य मामलों के विभाग के सचिव की जिम्मेदारी भी संभालेंगे।

सीडीएस के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि का प्राथमिक दायित्व एकीकृत सैन्य कमान स्थापित कर ‘थिएटराइजेशन मॉडल’ को लागू करना होगा, ताकि तीनों सेनाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।

सेना की पूर्वी कमान के पूर्व कमांडर जनरल चौहान ने सितंबर 2022 में देश के वरिष्ठतम सैन्य कमांडर के रूप में कार्यभार संभाला था। पहले प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत की तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु के नौ महीने बाद उन्होंने यह पद संभाला था।

सुब्रमणि ने 40 से अधिक वर्षों के अपने शानदार सैन्य करियर में विभिन्न भौगोलिक और अभियानगत परिस्थितियों में कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़े तमाम दायित्व निभाए हैं।

इससे पहले वह एक जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक थलसेना के उप प्रमुख रहे और मार्च 2023 से जून 2024 तक मध्य कमान के ‘जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ’ की जिम्मेदारी निभाई।

वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी से स्नातक हैं। वह 14 दिसंबर 1985 को ‘गढ़वाल राइफल्स’ की आठवीं बटालियन में शामिल हुए थे।

लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि ने ब्रिटेन के ब्रैकनेल स्थित ‘ज्वाइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज’ और नयी दिल्ली के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में भी अध्ययन किया है। वह ‘किंग्स कॉलेज लंदन’ से कला में स्नातकोत्तर और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एमफिल की डिग्री भी रखते हैं।

उन्होंने असम में ‘ऑपरेशन राइनो’ के तहत उग्रवाद-रोधी अभियान में ‘16 गढ़वाल राइफल्स’ की कमान संभाली, जम्मू-कश्मीर में ‘168 इन्फेंट्री ब्रिगेड’ का नेतृत्व किया और सेंट्रल सेक्टर में ‘17 माउंटेन डिवीजन’ की कमान भी संभाली और यह सब अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किया।

जनरल ऑफिसर के स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी दायित्वों में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में डिविजनल ऑफिसर, माउंटेन ब्रिगेड में ब्रिगेड मेजर, कजाकिस्तान में रक्षा अताशे, मिलिट्री सेक्रेटरी शाखा में सहायक सैन्य सचिव, पूर्वी कमान मुख्यालय में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के उप कमांडर, रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य खुफिया के उपमहानिदेशक, पूर्वी कमान में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में चीफ इंस्ट्रक्टर (सेना) तथा उत्तरी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ के पद शामिल हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जनरल ऑफिसर को पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर अभियानगत परिस्थितियों का गहन ज्ञान और व्यापक समझ है। विशिष्ट सेवाओं के लिए जनरल ऑफिसर को परम विशिष्ट सेवा पदक, अति विशिष्ट सेवा पदक, सेना पदक तथा विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।