ठाणे: 30 मई (ए)
) महाराष्ट्र के ठाणे जिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत ने एक कारोबारी से 2.75 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में एक आयकर अधिकारी को बरी करते हुए कहा कि अवैध मांग के सबूत के बिना केवल धन की बरामदगी से अपराध साबित नहीं होता।
विशेष न्यायाधीश डी एस देशमुख ने 2006 के एक मामले में आयकर अधिकारी अनिल रत्नाकर मल्लेल (44) को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत लगाए गए आरोपों से शुक्रवार को बरी कर दिया।
सह-आरोपी अतिरिक्त आयुक्त पंकज गर्ग की 2024 में मौत हो जाने के बाद उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, जे.पी. इलेक्ट्रॉनिक्स के जैसुखलाल वाघानी की शिकायत के बाद सीबीआई की भ्रष्टाचार-रोधी शाखा ने 13 दिसंबर, 2006 को जाल बिछाया था। वाघानी ने आरोप लगाया था कि जांच फाइल को मंजूरी देने के लिए अधिकारियों ने धन की मांग की थी।
अदालत ने कहा कि जब अभियोजन पक्ष शुरुआती मांग की बात साबित करने में विफल रहा हो, तो जाल बिछाकर जुटाए गए पूरे साक्ष्य संदेह के घेरे में आ जाते हैं।
उसने कहा कि ऑडियो प्रतिलेखों से पता चला कि शिकायतकर्ता ने खुद सक्रिय रूप से पैसे देने की पेशकश की थी, न कि मल्लेल ने उनसे जबरन वसूली की थी तथा गवाहों ने भी परस्पर विरोधाभासी बयान दिए।
अदालत ने आरोपी को सभी आरोपों से बरी करने का आदेश सुनाया।