नयी दिल्ली, 10 जुलाई (ए)
) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिनेता राजपाल यादव को ‘चेक बाउंस’ के मामलों में दोषी ठहराए जाने के फैसले को शुक्रवार को बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई।
न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने यादव को सातों शिकायतों में प्रत्येक शिकायतकर्ता को एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि अभिनेता द्वारा पहले ही अदा की जा चुकी लगभग दो करोड़ रुपये की राशि का समायोजन किया जाएगा। अदालत ने यादव को इस फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत का रुख करने के लिए दो महीने का समय भी दिया।
फैसले की विस्तृत प्रति का इंतजार है।
अदालत ने यह फैसला राजपाल यादव और उनकी पत्नी द्वारा दायर उन पुनरीक्षण याचिकाओं पर दिया, जो दोनों ने वर्ष 2019 में एक सत्र अदालत द्वारा सुनाए गए फैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी। सत्र अदालत ने एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा अप्रैल 2018 में चेक बाउंस के मामलों में उन्हें दोषी ठहराए जाने के निर्णय को बरकरार रखा था।
मजिस्ट्रेट अदालत ने अभिनेता को छह महीने के कारावास की सजा सुनाई थी।
जून 2024 में उच्च न्यायालय ने इस शर्त के साथ उनकी दोषसिद्धि पर अस्थायी रोक लगा दी थी कि वह दूसरे पक्ष के साथ सौहार्दपूर्ण समझौते की संभावना तलाशने के लिए ‘‘ईमानदार और वास्तविक प्रयास’’ करेंगे।
उस समय यादव के वकील ने कहा था कि यह फिल्म निर्माण के वित्तपोषण से जुड़ा एक वास्तविक लेनदेन था, लेकिन फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने से यादव को भारी वित्तीय नुकसान हुआ।
हालांकि, दो फरवरी को अदालत ने यह कहते हुए यादव को चार फरवरी को आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था कि उन्होंने राशि लौटाने के संबंध में अदालत को दिए गए अपने आश्वासनों का बार-बार उल्लंघन किया।
इसके बाद 16 फरवरी को अदालत ने उनकी सजा पर फिलहाल रोक लगा दी थी और शिकायतकर्ता के बैंक खाते में 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद उन्हें जेल से रिहा करने की अनुमति दी थी।