बलिया (उप्र): 13 जुलाई (ए)
) बलिया जिले के रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव में एक व्यक्ति की पुलिस पिटाई से मौत के आरोप के मामले में थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इससे पहले आरोपी उपनिरीक्षक और कांस्टेबल को निलंबित किया जा चुका है।
मामले में पुलिस उपनिरीक्षक, आरक्षी और ग्राम प्रधान सहित छह लोगों के खिलाफ हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने सोमवार को बताया कि रेवती थाने के प्रभारी राज केशर सिंह को कर्तव्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता, मनमाना आचरण और अक्षमता के आरोप में पुलिस लाइन स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि इसी मामले में आरोपी उपनिरीक्षक सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह को निलंबित किया गया है।
पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) सुनील सिंह ने रविवार को घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद बताया था कि मामले की जांच की जिम्मेदारी पुलिस लाइन के पुलिस उपाधीक्षक को सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के लिए जिलाधिकारी से अनुरोध किया जा रहा है।
बैरिया क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक गुप्ता ने बताया था कि रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी विशाल गोंड की तहरीर पर उपनिरीक्षक सचिन सरोज, कांस्टेबल अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, सूरज कन्नौजिया, उसके एक रिश्तेदार और प्रधान के चालक मनीष यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
तहरीर के अनुसार, सात जुलाई की शाम विशाल गोंड मांस खरीदने के लिए खेदन चौराहे स्थित सूरज की दुकान पर गया था, जहां विवाद हो गया। आरोप है कि सूरज के रिश्तेदारों ने विशाल को लाठी-डंडों से मारने का प्रयास किया, लेकिन वह वहां से बचकर निकल गया।
गुप्ता के अनुसार, शिकायत में कहा गया है कि ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह अपने चालक के साथ सूरज को थाने ले गए और विशाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद आठ जुलाई को पुलिसकर्मी सचिन सरोज और अंकित सिंह विशाल के घर पहुंचे और उसके पिता कामजी गोंड (42) को थाने ले गए।
इसमें आरोप लगाया गया है कि विशाल को थाने बुलाने के लिए पुलिसकर्मियों ने उसके पिता के साथ मारपीट की। इसके बाद ग्राम प्रधान और उसके चालक कामजी को अपने साथ ईंट-भट्ठे पर ले गए, जहां कथित तौर पर उनकी पिटाई कर उन्हें बगीचे में छोड़ दिया गया।
तहरीर के मुताबिक, गांव के बच्चों ने कामजी को बेहोशी की हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। परिजन उन्हें रेवती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से गंभीर हालत में जिला अस्पताल और बाद में वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 10 जुलाई की रात उनकी मौत हो गई। वाराणसी में ही शव का पोस्टमार्टम कराया गया।