स्कूलों में अनिवार्य बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू करने संबंधी याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

राष्ट्रीय
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नयी दिल्ली: सात अगस्त (ए) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को ‘डमी’ (केवल नामांकन के लिए संचालित) शैक्षणिक संस्थानों पर रोक लगाने के लिएस्कूली छात्रों की बायोमेट्रिक आधारित अनिवार्य उपस्थिति प्रणाली लागू करने के अनुरोध संबंधी जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति पी. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एन. के. गोस्वामी से कहा कि वह इस मामले में संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करें। साथ ही पीठ ने स्पष्ट किया कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर सुनवाई करने को इच्छुक नहीं है।

संविधान का अनुच्छेद 32 नागरिकों को अपने मौलिक अधिकारों को लागू कराने के लिए सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का अधिकार देता है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम आपको उच्च न्यायालय जाने की छूट दे रहे हैं।’’ इसके साथ ही अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

गोस्वामी ने अपनी याचिका में अन्य मांगों के साथ स्कूली छात्रों के लिए कोचिंग संस्थानों में पढ़ाई के घंटों की अधिकतम सीमा तय करने तथा कोचिंग संस्थानों के लिए बाध्यकारी आचार संहिता लागू करने का भी अनुरोध किया है। इस आचार संहिता में, प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के आंकड़ों में हेरफेर करने और भ्रामक विज्ञापन के लिए अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर रोक लगाने का प्रावधान करने की मांग भी शामिल है।