रामायण में सीता का चरित्र भगवान राम से अधिक महान था: मुख्यमंत्री शिवकुमार

राष्ट्रीय
Spread the love

बेंगलुरु: दो सितंबर (ए) कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बुधवार को महिलाओं की ताकत और उनके त्याग की सराहना करते हुए कहा कि रामायण में सीता का चरित्र भगवान राम के चरित्र से अधिक महान था। शिवकुमार ने महिला उद्यमियों से राज्य के विकास में नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान किया।

बेंगलुरु में ‘हम मिलकर आगे बढ़े- अंतरराष्ट्रीय महिला उद्यमी दिवस’ के पांचवें संस्करण के उद्घाटन के बाद शिवकुमार ने यह बात कही। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘उबंटू कंसोर्टियम ऑफ वूमेन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन’ ने किया था।

शिवकुमार ने कहा, ‘‘रामायण में सीता का चरित्र भगवान राम से भी कहीं बड़ा है। उनके त्याग और संघर्ष अनुकरणीय हैं। महिलाएं सृजन करने वाली होती हैं और आप में से जो महिलाएं तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए अपना कारोबार खड़ा कर चुकी हैं, वे भी दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।’’

उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं का नेतृत्व जरूरी है और राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाएं हमेशा से सृजनकर्ता, समस्याओं का समाधान करने वाली और निर्णय लेने वाली रही हैं। परिवार और संसाधनों को संभालने से लेकर व्यवसाय खड़ा करने तक, महिलाएं चुनौतियों को अवसर में बदल सकती हैं।

उन्होंने कहा कि जब महिलाओं की रचनात्मकता, क्षमता और दृढ़ संकल्प को पूंजी, तकनीक और बाजार तक पहुंच का सहयोग मिलता है, तो वे बहुत कुछ कर सकती हैं।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है। शिवकुमार ने युवाओं और महिलाओं की ताकत पर भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने पांच गारंटी योजनाएं शुरू की हैं—शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, अन्न भाग्य और युवा निधि।

उन्होंने शक्ति योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत महिलाएं पूरे राज्य में सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा करती हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इन गारंटी योजनाओं का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि गृह लक्ष्मी योजना के तहत राज्य की 1.22 करोड़ महिलाओं को हर महीने 2,000 रुपये मिलते हैं, जिससे उन्हें परिवार चलाने में मदद मिलती है।

उन्होंने महिलाओं के लिए राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें चार प्रतिशत ब्याज पर ऋण, सब्सिडी और स्त्री शक्ति योजना शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर साल चिकित्सा शिक्षा की पढ़ाई पूरी करने वाली चिकित्सकों में 40 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।

अंत में उन्होंने महिलाओं से कहा, ‘‘आप केवल रसोई तक सीमित नहीं हैं।’’

‘उबंटू कंसोर्टियम’ की वेबसाइट के अनुसार, यह देशभर के महिला उद्यमियों के संगठनों को एक साथ लाकर समावेशी राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करने का काम करता है।शिवकुमार ने कहा कि भारतीय समाज में अभी भी यह सोच मौजूद है कि पहली संतान बेटा होनी चाहिए, लेकिन इस सोच को बदलना जरूरी है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में महिलाओं को ‘परिवार की आंख’ बताते हुए महिला उद्यमियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने कारोबार चलाने में आने वाली आर्थिक चुनौतियों का सामना किया है और सरकार उन्हें हर संभव सहयोग देगी।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का उदाहरण देते हुए शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया जिनमें उनकी सास एवं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा उनके पति एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की मृत्यु भी शामिल थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने आगे बढ़कर पार्टी का नेतृत्व किया।

उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के पास दो बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर था, लेकिन उन्होंने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद संभालने दिया। शिवकुमार के अनुसार, यह महिलाओं द्वारा किए जाने वाले त्याग का एक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि महिलाएं नेताओं का पालन-पोषण करती हैं और उन्हें तैयार करती हैं।

महाभारत की द्रौपदी और कुंती का उदाहरण देते हुए शिवकुमार ने कहा कि महिलाओं में असीम प्रतिभा और क्षमता है और उन्हें नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आना चाहिए।